वक्त अब धरोहरों को बचाने का है। संस्कृति मंत्रालय ने ताजमहल के पास चार स्मारकों को एएसआई के संरक्षण में लाने की अधिसूचना के बाद फतेहपुर सीकरी में तीन धरोहरों को सहेजने की कवायद शुरू कर दी है। सीकरी में उत्तर पाषाण कालीन रॉक शेल्टर्स के साथ तेरहमोरी बांध के पास मौजूद मूसा खान का मकबरा और सिकरवार कुलदेवी मंदिर बावड़ी को भी संरक्षित किया जाएगा। यह तीनों धरोहरें सीकरी की पहाड़ियों पर जारी खनन के चलते खतरे में हैं।
फतेहपुर सीकरी में उत्तर पाषाण काल की पहाड़ियों पर आदि मानवों द्वारा उपयोग किए गए रॉक शेल्टर्स में बेहतरीन रॉक पेंटिंग मौजूद हैं। किरावली तहसील के गांव रसूलपुर में 12, मदनपुरा में 3, जाजाली में 8 और पतसाल में 4 रॉक शेल्टर्स खनन के चलते खत्म होने के कगार पर हैं। एएसआई ने रॉक आर्ट सोसायटी सचिव डा. गिरिराज कुमार की पहल पर रॉक शेल्टर्स को संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। शेल्टर्स में पेड़ पौधों, हथियार, हिरन और जंगली पशुओं का चित्रण किया गया है। पहाड़ों पर लगातार खनन से इन शेल्टर्स के पास की पहाड़ियां खत्म हो चुकी हैं।
रॉक शेल्टर्स के साथ ही एएसआई हजरत शेख सलीम चिश्ती के भाई मूसा खान के मकबरे और सिकरवार कुल देवी मंदिर बावड़ी को भी संरक्षित स्मारक घोषित करेगा। मूसा खान का मकबरा तेरहमोरी बांध से पहले और सिक रवार कुल देवी मंदिर बावड़ी सिकरवार किले के पास मौजूद है। एएसआई आगरा सर्किल से यह प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जा रहा है। आगरा में इस साल सात धरोहरों को संरक्षित करने के लिए प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं।
चार इमारतों के संरक्षण की अधिसूचना जल्द
वर्ल्ड हेरिटेज साइट ताजमहल के पूर्वी गेट पर ताज टैनरी (हवेली खान ए दुर्रान), हवेली आगा खान और हाथी खाना के साथ हेरिटेज कॉरीडोर को ‘साइट ऑफ मुगल गार्डन’ के नाम से चार संरक्षित स्मारकों की अधिसूचना इसी महीने ही आने वाली है। एएसआई ने प्री-नोटिफिकेशन को मंत्रालय को भेज दिया है।