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धरैरा हत्याकांड: गांव में मजदूर बनकर घूमी पुलिस, ग्रामीणों से की दोस्ती; ऐसे में पकड़ में आए तीनों हत्यारोपी

Sun, 14 Dec 2025 03:51 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आगरा के गांव धरैरा में पांच लोगों को माैत के घाट उतारा गया था। बच्चों और महिलाओं को कुल्हाड़ी से काट दिया था। मामले में 39 साल बाद पुलिस ने तीन हत्यारोपियों को गिरफ्तार किया है। 
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गिरफ्तार आरोपी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद लापता हुए तीनों आरोपियों को पकड़ना आसान नहीं था। वह कई वर्षों से गांव से दूर रह रहे थे। घर में जब भी पुलिस पहुंचती थी तो घर वाले यही बताते थे कि उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। पुलिस के डर से कहीं चले गए हैं। जिंदा है या मर गए हैं, यह भी पता नहीं है। पुलिस ने जाल बिछाकर उन्हें पकड़ा, इसके लिए पुलिस को मजदूर बनकर घूमना भी पड़ा।
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थाना प्रभारी के मुताबिक पुलिस को परिवार के लोगों की बात पर भरोसा नहीं था। एक साल पहले हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। इस पर थाना एत्मादपुर के दरोगा राम सुंदर और विपिन कुमार को लगाया गया। दोनों दरोगा गांव में मजदूर बनकर घूमने लगे। उन्हें पता था कि एक आरोपी को पकड़ेंगे तो बाकी आरोपी भाग जाएंगे। इस कारण तीनों को एक साथ पकड़ने की योजना बनाई। गांव के कुछ लोगों से दोस्ती भी कर ली।

वह आरोपियों के घर भी दूर से नजर बनाने लगे। तभी पता चला कि एक-एक कर आरोपी घर पर आते हैं और मिलकर चले जाते हैं। राजपाल की उम्र 74 वर्ष है। इस कारण वह बीमार भी रहता था। वह इलाज भी करा रहा था। पिछले दिनों मिलने आया तो पुलिस को सुराग मिल गया। इसके बाद सज्जन पाल और मानिकचंद भी आए थे।
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पुलिस तीनों को एक साथ पकड़ना चाहती थी। इसलिए जाल बिछाया। शुक्रवार रात तीनों राजपाल, सज्जन पाल और मानिकचंद को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद वह ज्यादा कुछ नहीं बता रहे थे। बस यही कहा कि वह दिल्ली और फर्रुखाबाद में रह रहे थे। फर्रुखाबाद में उनकी रिश्तेदारी है। मजदूरी करते थे। इससे जो गुजारा होता था उससे ही अपना जीवन यापन कर रहे थे। रकम बचने पर अपने परिवार के लोगों को भी दे देते थे।


 

पांच लोगों की कर दी थी हत्या
एत्मादपुर का गांव धरैरा 42 साल पहले पांच लोगों की हत्या से दहल गया था। घर में कुल्हाड़ी से किसान, उनकी मां, पत्नी और दो बच्चों को मौत के घाट उतार दिया गया था। दो और लोगों को मरणासन्न कर दिया था। प्राथमिकी दर्ज करवाने वाला कोई नहीं बचा था। इस पर पुलिस खुद वादी बनी थी। पुलिस जांच के दौरान आठ आरोपियों के नाम सामने लाई थी। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। दो साल बाद सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मगर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्हें डेढ़ साल बाद जमानत मिल गई। इनमें से पांच की मृत्यु हो गई। तीन लापता हो गए। तीनों को तकरीबन 39 साल बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर शनिवार को कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। सभी आरोपियों की उम्र 60 वर्ष से अधिक है।

घटना 3 अगस्त 1983 की है। एत्मादपुर के धरैरा गांव निवासी सुख स्वरूप (25), उनकी मां कटोरी देवी (50) वर्षीय, पत्नी राजवती (23), बेटे श्याम (7) और बेटी कल्लो (2) की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या हुई थी। उनके नौकर और बाबा को मरणासन्न कर दिया गया था। सुख स्वरूप किसान थे। पिता नंद सिंह ठाकुर की पूर्व में मृत्यु हो चुकी थी। सुख स्वरूप का अपने चाचा कुंवरपाल सिंह से पुश्तैनी जमीन के बंटवारे का विवाद चल रहा था।

 

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, घटना वाली साल प्रधानी के चुनाव भी होने वाले थे। चुनाव के लिए कुंवर पाल सिंह पक्ष ने तैयारी कर रखी थी। चुनाव प्रचार में लगे हुए थे। उधर, सुख स्वरूप ने भी अपनी मां कटोरी देवी को चुनाव में खड़ा करने का एलान कर दिया। इससे दोनों परिवारों के बीच रंजिश बढ़ गई थी।

इस घटना ने सभी को झकझोर दिया था। प्राथमिकी दर्ज करने वाला कोई नहीं मिलने से एत्मादपुर थाने के सिपाही रामपाल सिंह वादी बने। उनकी तहरीर पर हत्या की धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने अपनी जांच की। अज्ञात में प्राथमिक की थी। साक्ष्य संकलन किया गया तो आरोपियों के नाम सामने आ गए।

 
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विवेचना में आठ नाम उजागर
थाना प्रभारी ने बताया कि सुख स्वरूप के चाचा कुंवर पाल सिंह के छह लड़के थे। इनमें मंजू सिंह पाल, अजय पाल, रामपाल, कैश, राजपाल, सज्जन पाल, गज सिंह का बेटा सुमरपाल और नौकर मानिकचंद बघेल ने हत्या की साजिश रची थी। सभी ने मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 4 सितंबर 1983 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। सभी आरोपियों को 28 मार्च 1985 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

हाईकोर्ट में सुनवाई के बीच मंजू सिंह पाल, अजय पाल, रामपाल, कैशपाल और सुगर पाल की मृत्यु हो गई। जमानत पर बाहर आने के बाद राजपाल, सज्जन पाल और मानिकचंद लापता हो गए। कोर्ट ने तीनों के खिलाफ वारंट जारी किए। उनके हाजिर नहीं होने पर कुर्की की भी कार्रवाई की गई। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए। पिछले 1 साल से पुलिस उनकी तलाश में लगी हुई थी।

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