आगरा में मारपीट व अन्य आरोपों के मुकदमे में अपर सत्र न्यायाधीश अमरजीत ने गजक व्यवसायी बेदरिया राम के नाति विमल कुमार के साथ देवेंद्र कुमार और विनोद कुमार को 1 साल की परिवीक्षा पर रिहा करने के आदेश दे दिए।
थाना ताजगंज में दर्ज केस के अनुसार गजक व्यवसायी बेदरिया राम के नाती कपिल कुमार ने आरोप लगाया था कि उनके पिता हरी सिंह अपने पिता वेदरिया राम के नाम से गजक का व्यवसाय करते थे। ताऊ गुमान सिंह उनके यहां नौकरी करते थे। उनके यहां से हटने के बाद उन्होंने भी बेदरिया राम के नाम से गजक का व्यवसाय शुरू कर दिया। उनसे पिता ने उनसे ऐसा करने के लिए मना किया। बात न मानने पर कोर्ट में केस भी किया था। ताऊ गुमान सिंह व अन्य इस बात पर रंजिश मानने लगे।
16 नवंबर 2007 को सुबह 7 बजे उनके पिता पिता हरी सिंह घर पर बैठे थे। इस दौरान आरोपी हाथों में लाठी-डंडे लेकर आ गए। उनके पिता पर हमला कर दिया। पुलिस के सुनवाई न करने पर उन्होंने अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। आरोपियों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिए कि वह एक ही परिवार के सदस्य हैं। विमल की उम्र 60 साल, देवेंद्र की 65 साल और विनोद हाल में ही ओपन हार्ट सर्जरी हुई है। अदालत में परिवीक्षा का लाभ प्रदान किए जाने की याचना की थी।
गुमान सिंह की गैर इरादतन हत्या के आरोप में हरी सिंह को हो चुकी है उम्र कैद की सजा
अदालत ने इसी घटना में गुमान सिंह की गैर इरादतन हत्या के आरोप में गजक व्यवसायी बेदरिया राम के छोटे बेटे हरी सिंह को दोषी पाते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी। पिता गुमान सिंह की इलाज के दौरान मौत होने के बाद बेदरिया राम के नाती विमल कुमार ने अपने ताऊ व अन्य के खिलाफ थाना ताजगंज में केस दर्ज कराया था।