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परीक्षा समिति की अनुमति के बिना हजारों छात्रों को परीक्षा से वंचित किया

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परीक्षा समिति की अनुमति के बिना हजारों छात्रों को परीक्षा से वंचित किया
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विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अब औटा ने मोर्चा खोला
उड़नदस्तों के संचालन तवज्जो न देने से नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षाएं शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (औटा) की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला गया। यह आरोप लगाया कि परीक्षा समिति में कोई चर्चा किए बिना और अनुमति लिए बिना हजारों छात्रों को परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुद परीक्षाओं के संबंध में निर्णय ले लिया।
मुख्य परीक्षा में उड़नदस्तों के संचालन में औटा को तवज्जो न दिए जाने से भी संगठन के पदाधिकारियों में नाराजगी है। मंगलवार को संगठन की कार्यकारिणी की ऑनलाइन बैठक हुई। इसके बाद कुलपति को पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की गई। इसमें अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह और महामंत्री डॉ. भूपेंद्र चिकारा ने कहा है कि विश्वविद्यालय के परीक्षा से जुड़े पदाधिकारियों की ओर से निर्धारित प्रक्रियाओं व सुझावों का उल्लंघन किया जा रहा है। उड़नदस्तों के निर्धारण के संबंध में परीक्षा समिति में कोई विमर्श किए बिना सीधे निर्णय ले लिया गया है। यह विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है।
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पदाधिकारियों का कहना है कि उड़नदस्तों के गठन की प्रक्रिया से औटा को बाहर रखे जाना नियम विरुद्ध है। यह कहा कि भविष्य में कोई अनियमितता होती है तो उसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। औटा ने किसी शिक्षक का नाम उड़नदस्ते के लिए संस्तुत नहीं किया है।
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निर्धारित मानदंडों के अनुरूप परीक्षा कराई जा रही
प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय का कहना है कि विश्वविद्यालय की परीक्षाएं निर्धारित मानदंडों, विश्वविद्यालय के अधिनियमों व शासन के निर्देशों के अनुरूप कराई जा रही हैं। केंद्र निर्धारण समिति में औटा के अध्यक्ष और महामंत्री भी सदस्य के तौर पर थे। परीक्षा शांतिपूर्वक व नकलविहीन कराने के लिए दो कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर के नेतृत्व में उड़नदस्तों का गठन किया गया है। इसमें अधिकतर कॉलेजों के शिक्षक रखे गए हैं।
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