ताजनगरी आगरा में बकरीद पर कुर्बानी और जकात की एक बेहतरीन मिसाल सामने आई है। यहां एक परिवार ने बकरे की कुर्बानी न करके केक में बकरे की फोटो लगाकर काटा और बकरीद मनाई। इतना ही नहीं बकरे के लिए जो रुपए इकट्ठा किए थे, उन्हें केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए भेज दिया।
बुधवार को चारों ओर बकरीद की धूम रही। इस दिन लोगों ने बकरों की कुर्बानी दी। वहीं शाहगंज निवासी गुलचमन शेरवानी ने परिवार के साथ नए और अनोखे अंदाज में अपनी बकरीद मनाई। गुलचमन खुद को सच्चा देशभक्त मानते हैं और वे केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं।
गुलचमन के अनुसार बकरीद में ज़कात (दान) भी जरूरी होता है। इसको लेकर काफी विचार किया। फिर उन्होंने जूते का काम करने के दौरान बकरे की कुर्बानी के लिए जो पैसे इकट्ठे किये थे। उसे जकात में खर्च करने का मन बनाया। इसमें परिवार की सहमति भी जरूरी थी, तो सभी से बातचीत की। गुलचमन के परिजन भी राजी हो गए, तो बकरे की कुर्बानी के लिए इक्ट्ठा किए गए रुपए को केरल के बाढ़ पीड़ितों को भेज दिया।
परिवारोंवालों ने बकरीद का जश्न मानने के लिए जान की कुर्बानी को उचित नहीं समझा। गुलचमन ने बताया कि हम लोग मांसाहार नही खाते हैं और मैंने सालो से अनाज भी छोड़ रखा है। ऐसे में केक में बकरे की आकृति उतरवाई और उसे काटकर बकरीद मनाई।