सद्भाव की सतरंगी चादर के आगोश में ताज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मुगल बादशाह शाहजहां के 362वें उर्स के आखिरी दिन मंगलवार को सर्वधर्म सद्भाव का प्रतीक एक हजार मीटर लंबी हिंदुस्तानी सतरंगी चादर भूमिगत कक्ष में शहंशाह की शान में पेश की गई। ढोल-नगाड़ों के साथ सतरंगी चादर चढ़ाने के लिए लंबा जुलूस दोपहर बाद शुरू हुआ। सतरंगी चादर ने पूरे ताज को अपने आगोश में ले लिया। इसके पहले सुबह से ही कपड़ों और फूलों की चादरें और पंखे चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया, जोकि सूर्यास्त तक चलता रहा। इस दौरान एएसआई, सीआईएसएफ और पुलिस को भीड़ को काबू करने में पसीने छूट गए।
23 अप्रैल से ताजमहल में शुरू हुए मुगल बादशाह शाहजहां के उर्स में आखिरी दिन प्रवेश नि:शुल्क रहा। सूर्योदय के साथ ही शाहजहां और मुमताज महल की असली कब्रों पर कुल शरीफ, कुरान ख्वानी, फातिहा पढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया। विभिन्न संगठनों की ओर से चादरें चढ़ाने का क्रम देर शाम तक चलता रहा। इस दौरान चादरपोशी करने वाले तिरंगा लेकर भी आए। इस दौरान तमाम अकीदतमंदों ने न केवल चादरें चढ़ाईं बल्कि हलीम, बिरयानी और लड्डू बांटे। चादरपोशी के लिए आने वालों के लिए दक्षिणी गेट से रास्ता था, अन्य पर्यटकों का आवागमन पूर्वी और पश्चिमी गेटों से भी रहा। दोपहर साढ़े तीन बजे खुद्दाम ए रोजा कमेटी की ओर से सर्वधर्म सद्भाव का प्रतीक सतरंगी कपड़ों की एक हजार मीटर लंबी चादर पेश करने दक्षिणी गेट से निकले।
इससे पूर्व कमेटी ने 810 मीटर लंबी चादर चढ़ाई थी। इस चादरपोशी के लिए ताजगंज के सभी समुदायों के लोगों का सहयोग रहता है। कमेटी के लोगों ने नारेबाजी के बीच शाहजहां की कब्र पर चादरपोशी की। इस दौरान लंगर बांटा गया। इस मौके पर ताज के वरिष्ठ संरक्षण सहायक मुनज्जर अली, राजनरायन, कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिरउद्दीन ताहिर, रिजवान उद्दीन, मोहम्मद शमशाद, इब्राहीम जैदी, मोहम्मद इकबाल, हाफिज तनवीर, हाफिजर इरफान, शेख नईम उद्दीन, नूर मोहम्मद, हाफिज निजामुद्दीन, विपिन कुमार जैन, सरदार जसवीर सिंह, हरिओम शर्मा, सरोज गौर आदि मौजूद रहे।