ताजमहल में असली कब्रों के कक्ष में घुटन और सीलन से ठहरना मुश्किल हो रहा था। इस दफा एएसआई ने कक्ष की सीढ़ियों पर पंखा लगाया था मगर सांस लेना फिर भी मुश्किल था। ऐसे में भीड़ को काबू करने में सुरक्षाकर्मियों के पसीने छूट गए। 50 हजार से ज्यादा लोग इस कक्ष में कब्र देखने पहुंचे।
कब्रों में गूंजा हिंदुस्तान हमारा है...
आगरा। सतरंगी हिंदुस्तानी चादर चढ़ाने आए जायरीन ने भूमिगत कक्ष में नवी का नारा है...हिंदुस्तान हमारा है जैसे नारे लगाए। नारेबाजी ज्यादा बढ़ने पर कमेटी के लोगों ने युवकों को किसी तरह शांत कराया।
कई संगठनों ने चढ़ाईं चादरें
आगरा। उर्स में पहली चादर सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक की ओर से पेश की गई। इसके बाद एएसआई की ओर से अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. भुवन विक्रम, सीए मुनज्जर अली, उद्यान शाखा, फोटोग्राफर यूनियन, गाइड यूनियन, सफाई कर्मी यूनियन की ओर से भी चादरपोशी की गई। उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत और अंजुमन ए मोहम्मदिया की ओर से भी सतरंगी चादर पेश की गई। इस मौके पर जमील उद्दीन कुरैशी, नदीम नूदर, एमए काजमी, अफरोज खान आदि रहे। मंटोला से आई चादर के साथ डा. सिराज कुरैशी, इमरान कुरैशी, अदनान कुरैशी रहे।
उर्स में नियमों को किया दरकिनार
आगरा। ताजमहल में उर्स के दौरान 36 चादर और 16 फूलों के पंखे चढ़ाए गए। इस दौरान जायरीन की भीड़ के कारण ताज के कई नियम तार-तार हो गए। कहीं बच्चों ने हरियाली को नुकसान पहुंचाया तो कहीं वे बिरयानी के देग फोरकोर्ट से आगे मुख्य मकबरे तक पहुंच गए। कई चादरों के साथ आए युवाओं ने मुख्य मकबरे में स्थित कब्र में नारेबाजी की, जबकि ताज में नारेबाजी और प्रदर्शन पर प्रतिबंध है। एएसआई अधिकारी असहाय होकर ये सब देखते रहे।