दिवाली पर ‘कुछ मीठा हो जाए’, लेकिन छैने या मावा की मिठाई से नहीं, बल्कि चाकलेट से। पंचोत्सव के आगाज के साथ ही मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ तो है, लेकिन ड्राई फ्रूट्स और गिफ्ट पैक के लिए। मिलावटी मावा और एफएसडीए की छापेमारी से पहले ही लोगों में मिलावटी मिठाइयों के प्रति डर है। ड्राई फ्रूटस और जूस, बिस्किट, नमकीन आदि के गिफ्ट पैक लोगों को ज्यादा पसंद आ रहे हैं और इनकी रेंज भी कहीं ज्यादा है।
चॉकलेट और जूस के आकर्षक रूप से सजे हुए पैक अधिकांश मिठाइयों की दुकानों पर नजर आ रहे हैं। शहर के मिष्ठान भंडारों में उनकी मिठाइयां कम, गिफ्ट पैक की भरमार ज्यादा है। मिठाइयों के महंगे होने के कारण पहले तीन से पांच किलो की खरीद करने वाले एक किग्रा तक ही सीमित हैं, वहीं बच्चों को पसंद आने के कारण चाकलेट और नमकीन के पैक मिठाई का विकल्प बन चुके हैं।
आगरा मिठाई विक्रेता संघ के शिशिर भगत ने बताया कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए लोग मिठाइयों को कम खरीद रहे हैं। इसके एवज में ड्राई फ्रूट्स और बच्चों के लिए नमकीन, जूस, चॉकलेट के गिफ्ट पैक चलन में हैं। 150 से लेकर दो हजार रुपये तक के पैक डिमांड में हैं, वहीं ड्राई फ्रूट्स में काजू और बादाम के साथ किशमिश ज्यादा चल रही है। मिठाइयों के जल्द खराब होने के चलते लोगों का मोह ही भंग हो चुका है।