दो दिवसीय श्रद्धांजलि नाट्य समारोह में जानेमन नाटक मंचन करते हुए।
आगरा। सूरसदन प्रेक्षागृह की रोशनी जैसे ही धीमी हुई मंच पर उभरते हर दृश्य ने मन को भीतर तक झकझोर दिया। मच्छिंद्र मोरे लिखित नाटक जानेमन ने किन्नर समुदाय की उस भयावह सच्चाई से पर्दा हटाया जिसे समाज अक्सर मजाक व तमाशे के पीछे छिपा देता है। नाटक में दिखाया गया कि किन्नर हमेशा जन्मजात नहीं होते। कई बार समाज और परिस्थितियां किसी व्यक्ति पर यह पहचान थोप देती हैं और फिर उसके हिस्से आती है तिरस्कार और अपमान से भरी अधूरी जिंदगी। दो दिवसीय श्रद्धांजलि नाट्य समारोह के दूसरे दिन नाटक का मंचन देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। पूरा सभागार तालियां की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इमाटर्जी आर्ट्स एंड कल्परत सोसाइटी की ओर से प्रस्तुत इस नाटक में किन्नरों की वेदना दिखी। मंचन के दौरान दिखाया गया कि मुकेश स्त्री की ओर आकर्षित होकर अखाड़ा पहुंच जाता है। फिर नज्जो और पन्ना का उसे सहारा देती हैं और धीरे-धीरे वह मुकेश से नगीना बन जाता है। प्यार अपनापन और पहचान पाने की चाह में वह अपने अस्तित्व को नया रूप देता है लेकिन आगे हर कदम उसे पीड़ा, शोषण और धोखे की गहरी खाई में धकेल देता है। विवाह से लेकर देह-परिवर्तन तक बाहर टूटती दुनिया इस त्रासदी का साक्ष्य बनती है।
देवांश सिंह ने मुकेश (नगीना) के चरित्र को जीवंत कर दिया। साथ ही अभ्युदय मिश्रा, सक्षम मिश्रा, दिवाकर दुबे, मनीषा शर्मा सहित सभी कलाकारों ने अपने पात्रों से नाटक में जान डाल दी। समारोह में रंगकर्मी डिंपी मिश्रा को समिति के अध्यक्ष उमेश अमल, उपाध्यक्ष पंकज सक्सेना, राजीव सिंघल, उपसचिव संजय चतुर्वेदी, कोषाध्यक्ष संदीप अरोड़ा ने शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न और प्रशस्तिपत्र देकर रंग-प्रहरी सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में समिति के सचिव विश्वनिधि मिश्र ने आभार जताया। इस मौके पर दीपक जैन भी मौजूद रहे।