आगरा। जिस बल्ले की गूंज कभी मैदान में छक्कों के रूप में सुनाई देती थी, उस ‘सिक्सर किंग’ की आवाज अब हमेशा के लिए खामोश हो गई। चहेते क्रिकेटर और शानदार ऑलराउंडर मधुसूदन मिश्रा का निधन हो गया। लंबे समय से उनका दिल्ली में इलाज चल रहा था। उनके निधन से क्रिकेट जगत में शोक छा गया। तीन पीढ़ियों के क्रिकेटर नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।
मधुसूदन ने विश्वविद्यालय और आगरा कॉलेज क्रिकेट टीम की कप्तानी की थी। आक्रामक बल्लेबाजी उनकी पहचान थी। समर कैंप की शुरुआत से लेकर विभिन्न क्रिकेट टूर्नामेंटों के आयोजन तक वह सक्रिय रहे। हर साल मुफीद-ए-आम कॉलेज में पूर्व क्रिकेटरों की प्रतियोगिता कराते थे, जिसमें देश के अलग-अलग शहरों में रहने वाले आगरा के पुराने खिलाड़ी जुटते थे। पूर्व भारतीय चयनकर्ता राजिंदर सिंह हंस भी इसमें नियमित रूप से शामिल होते थे।
ताजगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह पर वरिष्ठ ओम सेठ, चंद्रशेखर शर्मा सीनियर और अनवर खान के साथ पूर्व रणजी क्रिकेटर सर्वेश भटनागर, नवीन गोस्वामी, संजीव सक्सेना, एलन पीटर, अतुल सोलंकी, अजय कदम, नईम, राममोहन शर्मा, अतुल चतुर्वेदी, विशाल भल्ला, चंद्रशेखर शर्मा जूनियर भी मौजूद रहे। उनसे क्रिकेट सीखने वाले मानिक बेरी, मोनू राठौर, प्रेम प्रभात, कुशबीर, सिद्धार्थ चतुर्वेदी और श्यामसुंदर यादव सहित कई खिलाड़ियों ने श्रद्धांजलि दी। भारतीय जूनियर क्रिकेट टीम के चयनकर्ता हरविंदर सोढ़ी, पूर्व रणजी खिलाड़ी बलदेव भटनागर, विवेक अग्रवाल, नरेंद्र शर्मा और मुईन बाबू सहित कई क्रिकेटर अंतिम विदाई में पहुंचे।