फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यमुना की गोद में बिना अनुमति के बसी आबादी

Fri, 24 Jul 2015 02:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
विज्ञापन
यमुना को मूलस्वरूप में लाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया तो सरकारी विभागों की लापरवाही की भी पर्तें खुलने लगीं। अनुमति के बिना ही यमुना किनारे तमाम कालोनी और मल्टीस्टोरी खड़ी हो गईं और अधिकारियों ने एक भी निर्माण को नहीं रोका। महीनों-सालों काम चलता रहा और अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधे बैठे रहे।
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति के सदस्य डीके जोशी ने पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) से सूचना के अधिकार के तहत यमुना किनारे हुए निर्माणों से संबंधित अनुमति की जानकारी मांगी थी। यूपीपीसीबी ने पिछले दिनों जो जवाब दिया, उससे यमुना को बदहाली तक पहुंचाने में उसकी भी लापरवाही उजागर हुई। विभाग ने डीके जोशी को यमुना के आसपास 44 निर्माणों की सूची दी है। इसमें स्वीकारा है कि नौ निर्माणों के लिए उसने अनुमति दी थी। जिसमें आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के स्वीकृत मानचित्र के आधार पर निर्माण किया जा सकता है। मगर, इसमें से किसी को भी रिहायश के लिए अनुमति नहीं दी गई। वहीं, मल्टीस्टोरी, कालोनी, भवन आदि 35 निर्माणों की यूपीपीसीबी से अनुमति नहीं ली गई। इसके बावजूद नदी के आसपास न सिर्फ निार्मण हुए बल्कि इनमें रिहायश हो गई। इसके बावजूद यूपीपीसीबी ने इन्हें रुकवाने का प्रयास नहीं किया।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें