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Agra News: पौधा छोटा पर हर आम है इसका खास

Thu, 26 Jun 2025 01:25 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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बाग में पौधे पर आए अमेरिकन  प्रजाति के टॉमी ए​टिकंस आम दिखाते कारोबारी गोपाल माहेश्वरी ।
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कासगंज। फलों का राजा कहे जाने वाले आम की इन दिनों बाजार में हर तरफ धूम है। आम के दीवाने दशहरी, लंगड़ा, चौसा, सफेदा समेत तमाम किस्म के आम का स्वाद का मजा ले रहे हैं। जिले में एक बाग ऐसा भी है जिसमें अनूठी किस्म के आम हैं। महज दो से तीन फुट ऊंचाई के इन पेड़ाें में आम लटक रहे हैं जो न केवल अपने आकार के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं बल्कि अपनी विशिष्ट गुणवत्ता के कारण उन्हें लुभा रहे हैं।
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दरअसल, कासगंज के कारोबारी गोपाल माहेश्वरी ने पिछले साल बाईपास पर लुहरा गांव में 60 बीघा के बाग में आम के 1200 पौधे रोपित किए। इनमें देश ही नहीं विदेश तक की सबसे महंगी और अनूठी किस्म शामिल हैं। इन दिनों जब हर तरफ आम की बहार है तो इस बाग में लगे दो से तीन फुट के इन पौधों पर भी आम लगे हैं। इनमें अमेरिकन प्रजाति का टॉमी एटकिंस अपनी विशेषताओं को लेकर सबसे अलग है तो जापान की मियाजाकी प्रजाति का आम अपने दाम को लेकर। मियाजाकी आम की बात करें तो इसे सबसे महंगा आम माना जाता है। जिसकी कीमत करीब डेढ़ से पौने तीन लाख रुपये प्रति किलो होती है। सुर्ख लाल रंग का यह आम देखने में भी बहुत मोहक लगता है। वहीं, अमेरिकन प्रजाति का टॉमी एटकिंस को मधुमेह रोग से पीड़ित आम के दीवाने भी खा सकते हैं। इसमें शुगर का स्तर सामान्य आम की तुलना में कम रहता है। इसकी दूसरी खासियत है कि जब भारतीय प्रजाति के आम की फसल आमद कम हो जाती है तब भी इसमें फसल आती है। पकने पर हरे से लाल रंग का हो जाता है और सेब की तरह नजर आता है। जल्दी खराब नहीं होने के अपने खास गुण के कारण यह ज्यादा दिनों तक रखा जा सकता है। कारोबारी गोपाल माहेश्वरी बताते हैं कि उन्होंने पिछले साल बाग में करीब 31 प्रजातियों के आम के पौधे लगाए थे जो अब पेड़ बन चुके हैं। इनमें दसहरी, अरुणिका, अंबिका, ब्लैक कस्तूरी, गुलाब खास, आम्रपाली, सुर्खा वर्मा, हुस्नआरा, जर्द आलू समेत पूसा सहित आम की अनेक प्रजातियां शामिल हैं। आम का राजा कहे जाने वाले अलफांसो के भी पेड़ हैं। इनके अलावा विदेशी प्रजातियों में अमेरिकी टॉमी एटकिंस व सेंसेशन, जापानी मियाजाकी, थाइलैंड के बनाना मैंगो, किंग ऑफ चकायत, रेड आइवरी, ब्लैक स्टोन और ब्रुनेई की प्रजाति ब्रुनेई किंग के पेड़ भी हैं।
एक साल में आने लगे आम: गोपाल माहेश्वरी बताते हैं कि बाग में लगाए गए पौधों में एक साल में ही आम आने लगे हैं। अमेरिकन टॉमी एटकिंस के कई आम निकल चुके हैं। इनमें से कुछ अभी भी पौधों पर लगे हैं। उन्होंने बताया कि दो साल के बाद इन पौधों पर भरपूर मात्रा में आम आने लगते हैं। ये समय के साथ बढ़ते चले जाते हैं। मियाजाकी प्रजाति के आम भी बाग में आने लगे हैं। जो दुनिया के सबसे महंगे आम कहे जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह आम भारतीय जलवायु में अच्छे से विकसित हो जाते हैं। बस थोड़ी सी देखभाल की जरूरत होती है।
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दूर-दराज से बाग देखने पहुंच रहे लोग : दो से तीन फुट के छोटे पेड़ों पर लाल रंग के विदेशी प्रजाति के आम लोगों में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। गोपाल माहेश्वरी बताते हैं कि दूर-दराज से लोग उनके बाग में इन आम को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। उनसे इन विदेशी आम के पौधों की मांग कर रहे हैं। जिससे अपने यहां भी इसे लगा सके।
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