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UP: अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद की दुकान पर नहीं मिला कब्जा, अब भी गुर्गों के पास प्राॅपर्टी; परेशान होकर उठाया ये कदम

Sun, 19 Jan 2025 12:39 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, फिराेजाबाद

सार


परेशान होकर हेमंत ने मुंबई हाईकोर्ट की शरण ली। पांच वर्ष तक इसका मुकदमा चला था। 19 दिसंबर 2024 को उनके नाम दुकान की रजिस्ट्री आखिर हो गई। उस दुकान पर आज भी दाऊद के गुर्गों का कब्जा है। 
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police - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फिरोजाबाद के लहरी कंपाउंड निवासी हेमंत जैन ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम की दुकान पर मालिकाना हक प्राप्त करने में तो 23 वर्ष बाद सफलता प्राप्त कर ली। अब कब्जे के लिए भटक रहे हैं। हेमंत जैन के अनुसार वह इलाका पुलिस से कब्जा दिलाने के लिए मिले थे। पुलिस ने मुंबई पुलिस कमिश्नर के पास भेज दिया। मुंबई के पुलिस कमिश्नर को कब्जा दिलाने के लिए पत्र देकर गुहार लगाई है। इसके बाद वह वापस लौट आए हैं।
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फिरोजाबाद के लहरी कंपाउंड निवासी हेमंत जैन को 11 जनवरी वर्ष 2001 को यह जानकारी मिली थी कि मुंबई बम धमाकों के मास्टर माइंड दाऊद की दुकान की नीलामी में कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। इसके बाद 1200 किलोमीटर दूर मुंबई चर्च गेट स्थित आयकर विभाग के कार्यालय पहुंचकर दाऊद की जयराज भाई स्ट्रीट स्थित दुकान को खरीदने की तैयारी कर ली थी। 

 

20 सितंबर 2001 को नीलामी में दो लाख रुपये की बोली लगाकर 144 वर्ग फीट की दुकान खरीद ली थी, लेकिन इसका मालिकाना हक पाने में उन्हें 23 वर्ष से अधिक का समय लग गया। इसके लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्जनों पत्र भेजे थे। 

 

इसके बाद कोई हल नहीं निकला तो उन्होंने मुंबई हाईकोर्ट की शरण ली। पांच वर्ष तक इसका मुकदमा चला था। 19 दिसंबर 2024 को उनके नाम दुकान की रजिस्ट्री आखिर हो गई। उस दुकान पर आज भी दाऊद के गुर्गों का कब्जा है। 
 

हेमंत जैन ने बताया कि वह 15 जनवरी को दुकान पर कब्जा पाने के लिए मुंबई के वर्ली स्थित पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। वहां उनकी दुकान से संबंधित पत्रावली के नागपाड़ा पुलिस थाने पर होने की जानकारी देते हुए वहीं जाने को कहा गया।
 
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थाने पर तो इंस्पेक्टर सोमनाथ अहीर ने कब्जा लेने के लिए मुंबई पुलिस कमिश्नर के पास प्रार्थना पत्र दिए जाने के लिए कह दिया था। अगले दिन वह फिर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंच गए, लेकिन मुलाकात न होने पर कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर दुकान पर कब्जा दिलाने की गुहार लगाई है। पत्र सौंपने के बाद वह वापस घर लौट आए हैं।
 
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