बटेश्वर मे धर्म यात्रा मे भगवान नेमिनाथ के बटेश्वर मे धर्म यात्रा मे सजी गिरनार पर्वत क
- फोटो : फाइल फोटो
बटेश्वर। विश्व जैन संगठन और सकल जैन समाज के तत्वावधान में 25 जून को दिल्ली से आरंभ हुई नेमिनाथ गिरनार धर्मयात्रा मंगलवार को जैन तीर्थ शाैरीपुर पहुंची। समाज के लोगों ने भव्य स्वागत किया। धर्मयात्रा में शामिल लोगों ने जियो और जीने दो, अहिंसा, शाकाहार, जीवों पर दया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
22 वें जैन तीर्थकर भगवान नेमिनाथ के 20 जुलाई को होने वाले मोक्ष कल्याणक के लिए 25 दिवसीय नेमिनाथ गिरनार धर्म यात्रा 25 जून को कृष्ण नगर, दिल्ली से आरंभ हुई थी। यह यात्रा करीब 5100 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। नोएडा और आगरा होते हुए यह धर्म यात्रा मंगलवार सुबह 6:30 बजे जैन तीर्थ शौरीपुर पहुंची। यहां जैन समाज के लोगों ने धर्मयात्रा का भव्य स्वागत किया। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन ने बताया देश के 10 राज्यों के लगभग 60 शहरों से होकर धर्म यात्रा 19 जुलाई को गिरनार (गुजरात) पहुंचेगी। 20 जुलाई को भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा और गिरनार पर्वत की वंदना की जाएगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान नेमिनाथ की मोक्ष स्थली गिरनार पर्वत की वंदना करना और पूरे समाज को इसके प्रति जागरूक व प्रेरित करना है। इस दौरान अचल जैन, अनुज जैन, अभिषेक जैन, निपुण जैन और गौरव जैन आदि दर्जनों लोग मौजूद रहे।
भगवान श्रीकृष्ण के चचेरे भाई थे नेमिनाथ
भगवान नेमिनाथ जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर थे। इनका जन्म शौरीपुर, बटेश्वर में यदुवंशी राजा समुद्र विजय और रानी शिवा देवी के यहां हुआ था। इस नाते वे भगवान श्रीकृष्ण के चचेरे भाई थे। भगवान नेमिनाथ का अधिकांश समय कठिन तप और साधना में बीता। उन्होंने गुजरात के जूनागढ़ में स्थित गिरनार पर्वत पर घोर तपस्या की और आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अष्टमी को इसी पावन पर्वत से मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया।