एचटी लाइन के करंट से बिरखेपुरा में मृतक जितेन्द्र सिंह की पत्नी पारस देवी हुई बेसुध
बाह। छह महीने पहले बिरखेपुरा के जितेंद्र सिंह की शादी दया का नगला फिरोजाबाद की पारस देवी के साथ हुई थी। पारस देवी के हाथों की मेहंदी ठीक से छूट भी नहीं पाई है कि बुधवार को जितेंद्र की मौत के साथ उसका सुहाग उजड़ गया। पति का शव देखकर बेसुध हुई पारस देवी बस यही कह रही थी कि बिन सुहाग के कैसे जीऊंगी? मृतक की मां गिरजा देवी भी सुधबुध खो बैठी हैं। एक तरफ बेटे का शव पड़ा था, दूसरी तरफ सुहाग उजड़ने से बेसुध हुई पत्नी थी। ढांढ़स बंधाने वालों को यही बोल रही थी कि ईश्वर ने बेटे से पहले उसे ही उठा लिया होता तो अच्छा रहता। कैसे बहू को संभालूंगी?
लाइन हटने के बाद ही उठने दिया शव
बिरखेपुरा में घरों की छत के ऊपर से गुजर रही एचटी लाइन को हटाने के लिए एक साल से गांव के लोग शिकायत कर रहे थे। मृतक जितेंद्र सिंह के पिता मुकेश कुमार व परिजन ने बताया कि दो कुत्ते एचटी लाइन के करंट से मरे, तब शिकायत की। छत पर बैठा मोर मरा, तब लाइन हटाने की गुहार लगाई, लेकिन बिजली विभाग ने एक नहीं सुनी। उन्होंने बताया कि लाइन शिफ्ट कराने के नाम पर 2 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाया था। गरीबी का हवाला दिया तो 1.40 लाख रुपये की मांग की गई। पुलिस और बिजली अधिकारी के सामने चीख चीख कर परिजन यही आरोप लगाए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि शव तभी उठने देंगे, जब छत के ऊपर से बिजली की लाइन हटेगी। आनन फानन में बिजली की लाइन को हटाया गया। तार समेटे, तब जांच और आर्थिक सहायता का आश्वासन अधिशाषी अभियंता रोहित शर्मा ने दिया। एसओ खेड़ा राठौर ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर बुधवार की शाम 4.30 बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए उठने दिया।
मृतक के दिव्यांग माता-पिता बोले- कैसे पीले होंगे बेटी के हाथ
बिरखेपुरा में जितेंद्र की मौत से परिवार टूट गया है। खेती बाड़ी पर आश्रित परिवार में कोई संभालने की स्थिति में नहीं है। माता गिरजा देवी एवं पिता मुकेश कुमार पैरों से दिव्यांग हैं। बड़े बेटे जितेंद्र की कमाई पर परिवार आश्रित था। दोनों ने बताया कि बड़ी बेटी पूजा के लिए रिश्ता देख रहे थे। छोटी बेटी मोहिनी 10 साल की है। छोटा बेटा अंकुश 7 साल का है। बेटी के हाथ कैसे पीले होंगे? विधवा बहू को कैसे संभालेंगे? जिंदगी किसके भरोसे कटेगी। बिजली विभाग की लापरवाही ने बेटे को छीना तो सपने भी चकना चूर हो गए। हादसे से टूटे परिवार को ढांढ़स बंधाने वाले भी घरों की छत पर एचटी लाइन को देखकर गुस्सा हुए बिना नहीं रह सके।