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जमीन के लिए फर्जी मौत: 13 साल पहले जो मर गया था, वो मिला जिंदा; छह पुलिस वालों पर प्राथमिकी दर्ज

Thu, 12 Mar 2026 08:21 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में जमीन विवाद में कुर्की से बचने के लिए आरोपी ने पुलिस की मिलीभगत से खुद को मृत घोषित करा दिया। 13 साल बाद वादी ने उसे स्कूटी चलाते देख फोटो खींची, जिसके बाद अदालत के आदेश पर छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
 
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सांकेतिक फोटो - फोटो : istock
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विस्तार
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 जमीन विवाद में कुर्की से बचने के लिए खुद को मृत दर्शाने के 13 साल पुराने मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी, मुंशी सहित छह लोगों पर न्यू आगरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले का खुलासा तब हुआ जब वादी ने आरोपी को स्कूटर चलाते हुए देखकर उसकी तस्वीर खींच ली थी। अदालत के आदेश पर अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
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सिकंदरा के औद्योगिक क्षेत्र स्थित रूबी टॉवर निवासी राजकुमार वर्मा ने बताया कि उनके पिता मदन गोपाल ने 21 अप्रैल, 1999 को गांधीनगर निवासी विद्या देवी, ताराचंद और अन्य पर वाद दर्ज कराया था। न्यायालय ने 2011 में ताराचंद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट और फिर कुर्की की कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद ताराचंद ने अपने बेटे गिरीश चंद, नगला पदी निवासी घनश्याम दास उर्फ राजू टंडन और राजकुमार वर्मा उर्फ टीटू के साथ मिलकर साजिश रची।

 

उन्होंने तत्कालीन थाना प्रभारी न्यू आगरा और थाने के मुंशी से साठगांठ कर फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ न्यायालय में खुद के मृत होने की रिपोर्ट भिजवा दी। 5 नवंबर, 2025 को वादी राजकुमार वर्मा गांधी नगर गए तो ताराचंद स्कूटी पर घूमता मिला। उन्होंने उसकी फोटो खींच ली और न्यायालय में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। ताराचंद ने 2016 में अपने नाम से स्कूटी खरीदी थी।

 

न्यायालय ने थाना न्यू आगरा को जांच कर रिपोर्ट भेजने के लिए कहा। 13 जनवरी, 2026 को थाना न्यू आगरा प्रभारी ने ताराचंद के जीवित होने की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की। इसके बाद न्यायालय ने थाना न्यू आगरा को कार्रवाई के आदेश दिए।

 
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साक्ष्य जुटा रही पुलिस
न्यायालय के आदेश के बाद थाना न्यू आगरा में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें तत्कालीन थाना प्रभारी, रिपोर्ट न्यायालय भेजने वाले पुलिसकर्मी, आरोपी ताराचंद और उसके पुत्र समेत छह लोग शामिल हैं। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि कोर्ट में जीवित होने के सबूत दिए गए थे, जिसके आधार पर केस दर्ज करने के आदेश हुए हैं। मामले में संबंधित साक्ष्य जुटाए जाएंगे। जिन पुलिसकर्मियों ने मृत्यु प्रमाणपत्र लगाने में भूमिका निभाई थी, उनके भी बयान दर्ज होंगे और कार्रवाई की जाएगी।
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