सभी को ये जानकर हैरानी होगी कि बीस रुपये की खातिर यमुना एक्सप्रेस वे पर हर रोज हजारों लोग अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं। जी हां, एक्सप्रेसवे पर प्रतिदिन 150 से भी ज्यादा डग्गामार बसें यात्रियों की जानमाल से खिलवाड़ कर रही हैं। बीस रुपये के लालच में लोग इन बसों में बैठ जाते हैं और अपनी जान को मुसीबत में डाल लेते हैं।
नोएडा से आगरा तक चलने वाली यह बसें रास्ते भर सवारी उतारते और बैठाते हुए चलती हैं जबकि कहीं भी कोई स्टॉपेज नहीं है। यही वजह है कि लूट की घटनाएं डग्गामार बसों में ज्यादा हो रही हैं। नोएडा से आगरा तक चलने वाली प्राइवेट बसों में मथुरा और आगरा के साथ-साथ रास्ते में पड़ने वाले सभी कस्बों की सवारियां बैठा ली जाती हैं। किसी ने भी सड़क किनारे खड़े होकर अगर हाथ दे दिया तो बस रुक जाती है।
कुछ दिन पहले ऐसे हुई थी लूट
loot at gunpoint
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बुधवार को नोएडा से चली बस रात को करीब नौ बजे सुरीर थाना क्षेत्र में माइल स्टोन 80 पर पहुंची तो सड़क किनारे खड़े तीन युवकों ने हाथ दिया। बस के चालक नोएडा निवासी ओमप्रकाश ने बस को रोक लिया और तीनों युवकों को बैठा लिया। इन तीनों ने बस में सवार होने के साथ ही हथियार निकाल लिए और यात्रियों को धमकाना शुरू कर दिया। लाखों की नगदी और जेवरात लूटकर भाग गए।
पहले भी हो चुकी हैं वारदातें
लूट
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बीते बुधवार को हुई लूट कोई पहली घटना नहीं है। 2015 में भी एक्सप्रेसवे पर एक डग्गामार बस में चार यात्रियों को लूटकर बदमाश फरार हो गए थे। 2016 सितंबर में बस कंडक्टर से कैश लूटने की कोशिश की गई थी। कंडक्टर को लूटने वाले बदमाश भी सवारी बनकर ही बस में सवार हुए थे।
पलवल टोल के पास 2016 दिसंबर में आगरा से नोएडा जा रही बस में चार लोग सवारी बनकर चढ़े थे और यात्रियों के साथ लूटपाट की थी। पुलिस ने इस घटना को दर्ज नहीं किया था। युवकों का आपसी विवाद बताकर मामला टरका दिया था।
एक्सप्रेसवे पर नहीं है कोई स्टॉपेज
bus stop
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यमुना एक्सप्रेसवे कॉरीडोर इंचार्ज मेजर मनीष ने बताया कि 165 किलोमीटर के एक्सप्रेसवे पर कहीं कोई स्टॉपेज है ही नहीं। सड़क पर अवैध तरीके से बसों को रोककर सवारी बैठाई और उतारी जाती हैं। इससे सुरक्षा को खतरा पैदा होता है।
नोएडा से आगरा तक कहीं नहीं दिखती पुलिस
UP Police
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यमुना एक्सप्रेसवे पर नोएडा से आगरा तक कहीं भी पुलिस नजर नहीं आती है। हालांकि दस से भी ज्यादा थानाक्षेत्रों से एक्सप्रेसवे गुजर रहा है लेकिन सुरक्षा के नाम पर कहीं कुछ नहीं दिखता। यही वजह है कि लूट की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं।