आगरा। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में नए उद्योगों की स्थापना और पुराने उद्योगों के विस्तार पर सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में रोक लगाई थी। इससे जिले में नई औद्योगिक इकाइयों के पंजीकरण से लेकर निवेश और रोजगार के अवसर सिमट गए हैं। यह खुलासा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएमएमई) की रिपोर्ट से हुआ है।
एसएमएमई की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में नवंबर माह तक वर्ष 2024-25 की तुलना में 1.20 लाख रोजगार के अवसर घट गए हैं। 70 लघु उद्यम कम हुए हैं। 2024-25 में जहां 40150 यूनिट ने पंजीकरण कराया था। इनमें 10 मध्यम श्रेणी और 110 लघु उद्यम थे। 3.99 लाख रोजगार के अवसर सृजित हुए थे। 530 करोड़ रुपये का निवेश था। वहीं, नवंबर 2025 तक 10 हजार उद्यम कम पंजीकृत हुए हैं। वहीं मध्यम श्रेणी के उद्यमों की संख्या 10 से घटकर इस साल 5 रह गई।
लघु श्रेणी के उद्यमों की संख्या पिछले साल की तुलना में 110 से घटकर 39 रह गई है। 2.50 करोड़ से 25 करोड़ रुपये तक सालाना कारोबार करने वाले उद्यम लघु श्रेणी और 25 से 125 करोड़ तक के उद्यम मध्यम श्रेणी में शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की रोक से पहले 2023-24 में आगरा में 790 करोड़ रुपये का निवेश विभिन्न उद्यमों से हुआ था। 1.95 लाख रोजगार के अवसर सृजित हुए थे। वहीं, लघु श्रेणी के उद्यम तब 242 पंजीकृत हुए थे।
संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार का कहना है कि उद्यम पंजीकरण में आई कमी की सबसे बड़ी वजह टीटीजेड में लगी बंदिशें हैं। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि उद्योगों पर लगी रोक को लेकर सरकार प्रभावी पैरवी कर रही है। जनवरी में सुनवाई होगी। राहत मिलने की उम्मीद है।