राजकुमार के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ स्पष्ट नहीं
भरतपुर हाउस में सोमवार दोपहर हुए गोलीकांड की गुत्थी सुलझने के बजाय और उलझ गई। मंगलवार सुबह पुलिस ने जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी तो इससे अंदाजा लगाया कि उन्हें गोली पांच फुट से अधिक दूरी से मारी गई थी। वजह यह थी कि गोली लगने और निकलने की जगह पर जलने या झुलसने का निशान नहीं था। ऐसा तभी होता है जब गोली दूर से मारी जाए। लेकिन शाम को फोरेंसिक एक्सपर्ट से रिपोर्ट का अध्ययन कराया तो कहानी बदल गई। उन्होंने बताया कि राजकुमार की मृत्यु से पूर्व उनका दो घंटे पुष्पांजलि हास्पिटल में उपचार चला था। उनके जख्मों पर टांके लगा दिए गए थे। मरहम भी लगाया गया था। इसके चलते पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जलने या झुलसने का निशान नहीं बताया गया है। इस रिपोर्ट में कोई स्पष्ट राय नहीं है। पुलिस अब उनके उपचार की डिटेल रिपोर्ट का अध्ययन करेगी। इसके अलावा क्राइम सीन का री कंस्ट्रक्शन भी कराया जाएगा।
बता दें, राजकुमार लालवानी की कोठी में यह गोलीकांड हुआ था। चार गोलियां चलाई गई थी। इतनी ही गोलियां उनके रिवाल्वर से गायब थी। इसमें चार ही खोखे मिले थे। एक गोली उनके सिर में लगी थी। दो गोलियां उनसे मिलने आए उनके सराफ दोस्त सुनील रस्तोगी को पीठ में लगी थी। इनमें एक लिवर में धंसी और दूसरी रीढ़ की हड्डी में। राजकुमार की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। सोमवार देर रात वीडियो कैमरे के सामने उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
सीओ हरी पर्वत अनुराग वत्स ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में बताया कि इसमें टेटोइंग या ब्लैनिंग नहीं है। ये निशान नजदीक से गोली चलाने पर आते हैं। मतलब यह है कि गोली पांच फुट से अधिक दूरी से चलाई गई। उधर इसी आधार पर पुलिस ने मान लिया था कि उन्हें गोली सुनील रस्तोगी ने मारी। लेकिन देर शाम एसपी सिटी सुशील घुले ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ब्लेकनिंग या टेटोइंग न आने की वजह राजकुमार का दो घंटे चला उपचार हो सकती है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि गोली दूर से मारी गई। पुलिस अब उपचार की रिपोर्ट की स्टडी करेगी। इससे उनके सिर के घाव देखे जाएंगे। यह भी मालूम किया जाएगा कि घाव के पास निशान कैसे थे? जलने या झुलसने जैसे निशान थे या नहीं। इसी से अंदाजा लग पाएगा कि गोली दूर से मारी गई या नजदीक से।
सुबह : दूर से मारी गोली
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से पुलिस ने मंगलवार सुबह बताया कि राजकुमार को गोली पांच फु ट से ज्यादा दूर से मारी गई थी। इससे साफ था कि उन्होंने खुद को गोली नहीं मारी। मतलब यह भी था कि उन्हें संजीव ने गोली मारी।
शाम : कुछ स्पष्ट नहीं
फोरेंसिक एक्सपर्ट की राय के बाद पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि उन्हें गोली नजदीक से लगी या दूर से मारी गई। इसकी जानकारी के लिए उनके उपचार की रिपोर्ट देखी जा रही है।
यह है पोस्टमार्टम रिपोर्ट
राजकुमार लालवानी को एक गोली लगी। यह दायीं ओर कान के ऊपर से घुसी और सिर से होकर निकली। गोली लगने के स्थान पर न तो त्वचा झुलसी है और न ही निकलने की जगह पर बाल जले हैं। चिकित्सकीय भाषा में न तो स्कार्चिंग ( झुलसना ) और न ही ब्लैकनिंग ( जलने से काला पड़ जाना ) है। इसके आधार पर पुलिस ने बताया कि गोली पांच फुट से अधिक दूरी से मारी गई है लेकिन शाम को पुलिस ने फोरेंसिक एक्सपर्ट को यह रिपोर्ट दिखाई। इसके बाद एसपी सिटी ने बताया कि रिपोर्ट से कुछ स्पष्ट नहीं है।
संजीव की हालत गंभीर, दिल्ली रेफर किया गया
भरतपुर हाउस गोलीकांड में दो गोलियां लगने से घायल हुए सराफ संजीव रस्तोगी की हालत गंभीर बनी है। उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम हास्पिटल रेफ र किया गया है। इससे पहले शहर के जीजी नर्सिंग होम में उपचार चल रहा था। डाक्टर ने बताया कि उन्हें एक गोली लिवर में और एक रीढ़ की हड़्डी में लगी थी। आपरेशन करके लिवर में फंसी गोली निकाल दी गई है। रीढ़ की हड्डी में अभी भी गोली फंसी है। इसे भी आपरेशन से निकाला जा सकता है। लेकिन दो खतरे हैं। एक तो संक्रमण फैलने का। दूसरा पैरालायसिस हो जाने का। उधर पुलिस ने दो सिपाही उनके साथ भेजे हैं।
दोस्त ने पेश की नई कहानी
गोलीकांड की वजह एमसीएक्स में लगाए गए 10 करोड़ का लेन देन बताया जा रहा था। लेकिन सुनील के दोस्त राधेश्याम ने पुलिस को मंगलवार को नई कहानी बताई। उसका कहना है कि राजकुमार और संजीव ने मिलकर 700 वर्ग गज का प्लाट दो करोड़ में खरीदा था। इसे 2.5 करोड़ में बेचा गया। मुनाफे का पूरा 50 लाख राजकुमार के पास था। सुनील अपने हिस्से के25 लाख मांग रहे थे। इसके लिए ही उनकी कोठी के चक्कर लगा रहे थे। मोबाइल पर हुई बातचीत में इसकी रिकार्डिंग भी मौजूद है। सुनील के परिवार ने मोबाइल भी पुलिस को दे दिया है।
जांच पड़ताल दूसरा दिन
- सुनील रस्तोगी का ड्राइवर हिरासत में है, उससे पूछताछ जारी रही।
- सुनील रस्तोगी की तबीयत कुछ सुधरी, पुलिस ने उनका मजिस्ट्रेटी बयान कराया।
- सुनील और राजकुमार के रिश्तेदारों से भी पुलिस ने पूछताछ की।
- भरतपुर हाउस के गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज फिर से देखी गई।
- कालोनी के रजिस्टर से पता चला कि सुनील 30 दिन में 20 बार राजकुमार के घर आए।
- यह भी साफ हुआ कि हर बार उन्होंने एंट्री गागा भाई के नाम सी करवाई थी।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने सुनील के खिलाफ साक्ष्य जुटाना शुरू किया।
एक पर्दा उठा नहीं, दो और गिर गए
पहेली बनकर रह गई राजकुमार को लगी गोली
भरतपुर हाउस गोलीकांड में अपनी ही कोठी में मारे गए जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी को लगी गोली पहेली बनकर रह गई है। रहस्य से एक पर्दा उठ नहीं पाया है, दो और गिर गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन्हें लगी गोली कहां चली गई? यह मौके पर पुलिस को नहीं मिली। पुलिस यह भी साफ नहीं कर पा रही है उन्हें लगी गोली उनके ही रिवाल्वर से चली या फिर सुनील रस्तोगी के। सुनील के मोबाइल की काल डिटेल भी चेक की जाएगी। राजकुमार लालवानी की रिवाल्वर से चार गोली चलीं। चार खोखे मैगजीन में मिले। कुल चार गोलियों की ही आवाज सुनी गई थी। सुनील को लगी दोनों गोलियां रिवाल्वर की बताई गई हैं। लेकिन राजकुमार को लगी गोली मिली ही नहीं है। पुलिस अब सुनील औौर राजकुमार के रिवाल्वर का बेलेस्टिक परीक्षण कराएगी। सुनील के बेटे सनी ने पुलिस को लाइसेंसी रिवाल्वर सौंप दिया है। बेलेस्टिक परीक्षण से पता चलेगा कि इससे गोली चलाई गई या नहीं। इसमें लंबा समय लगता है। सवाल यह भी है कि रस्तोगी के पास उस समय अपना रिवाल्वर क्यों नहीं था? उनके परिवार के नजदीकी लोगों ने बताया है कि वे इसे अपने साथ ही रखते थे।
इस रिवाल्वर से दशहरे से नहीं चली गोली
सनी ने पुलिस को पापा सुनील रस्तोगी का रिवाल्वर सौंपने के साथ कहा कि इससे दशहरे के बाद से कोई गोली नहीं चली है। दशहरे पर हवाई फायर किया गया था। बेलेस्टिक परीक्षण में सच सामने आ जाएगा।
सिंधी समाज गुस्से में, आज एसएसपी का घेराव
पुलिस पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया
भरतपुर हाउस गोलीकांड में मारे गए जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी के शव का दाह संस्कार मंगलवार सुबह किया गया। इसके बाद श्मशान घाट पर ही सिंधी समाज के नेताओं और भरतपुर हाउस कालोनी के लोगों की मीटिंग हुई। इसमें तय किया गया कि बुधवार को एसएसपी का घेराव किया जाएगा। उनसे पूछा जाएगा कि पुलिस राजकुमार की हत्या के केस में कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है।
सेंट्रल सिंधी पंचायत के अध्यक्ष जीवतराम करीरा, महामंत्री गागनदास रामानी, संरक्षक हेमंत भोजवानी, श्याम भोजवानी के अलावा सर्वप्रकाश कपूर ने योजना तैयार की। कपूर ने बताया कि पुलिस मामले में कार्रवाई के बजाय ढिलाई बरत रही है। सचाई को छुपाया जा रहा है।
अधिकारी मंगलवार सुबह कह रहे थे कि राजकुमार ने सुसाइड नहीं किया। इसके अलावा एमआरआई रिपोर्ट में उनके सिर में दो गोलियां आई हैं। इससे भी साफ है कि उनकी हत्या की गई। कोई इंसान सिर में दो गोली कैसे मार सकता है। इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है, जबकि हत्या का केस दर्ज है।
संजीव ने मुट्ठी में कर लिए थे गार्ड
सिंधी समाज के नेताओं का आरोप है कि राजकुमार की हत्या के मुकदमे में नामजद सराफ संजीव रस्तोगी ने भरतपुर हाउस कालोनी के गार्ड अपनी मुट्ठी में कर लिए थे। वह हर दूसरे दिन आता था। उसे देखते ही गार्ड सेल्यूट करते थे। वह गलत नाम से एंट्री करता था। उनका यह भी आरोप है कि सोमवार की घटना के बाद गार्ड एक्शन में नहीं आए।
कैमरे पड़े खराब, कैसे मिले सुराग
शहर मे लगे सीसीटीवी कैमरों में से सैकड़ों शो-पीस बने
केस - 1
मदिया कटरा रोड से छात्र दिव्य का अपहरण हुआ तो पुलिस ने पूरी रोड पर लगे 12 कैमरे चेक किए। दस खराब मिले।
केस - 2
सराफ धन कुमार जैन पर पिछले साल नवंबर में हमला हुआ तो एमएम गेट के 20 कैमरे चेक किए गए। इनमें से 15 खराब मिले।
केस - 3
पिछले साल जून में ही सराफ रिंकू बंसल के साथ हुई लूट में विजय नगर के तमाम कैमरे चेक किए गए। कोई भी ठीक नहीं मिला।
ऐसा हर बड़ी वारदात के बाद हो रहा है। मौका ए वारदात के आसपास कैमरे लगे तो मिल जाते हैं लेकिन घटनाक्रम इनमें कैद नहीं हो पाता। अब भरतपुर हाउस कालोनी में भी यही हुआ। मेन गेट के कैमरे काम कर रहे थे। इसके तीसरे नंबर पर राजकुमार लालवानी की कोठी है। इसके कैमरे खराब थे। इसके आसपास की कोठियों पर भी कैमरे लगे हैं लेकिन ये भी खराब थे। अगर ठीक होते तो सारी गुत्थी सुलझ जाती।
सिर्फ कालोनी और बाजार नहीं, बैंकों के कैमरे भी खराब हैं। पिछले दिनों हुई चेकिंग में बैंकों की छह शाखाओं में कैमरे चालू नहीं मिले। इन्हें नोटिस जारी किया गया है। एटीएम का भी यही हाल है। साइबर सेल ने आठ एटीएम से ठगों के फोटो हासिल किए। एक भी साफ नहीं है। कैमरे घटिया किस्म के हैं। कई जगह कैमरे गलत दिशा में लगे थे। तस्वीर साफ नहीं आई।