- रामेश्वर दास
आगरा। राष्ट्रीय और राज्य स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में दमखम दिखाने वाले विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षाओं में भी शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और जुनून हो तो खेल और पढ़ाई दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) के 10वीं और 12वीं के परिणामों में ऐसे कई छात्र-छात्राओं ने 78 से 98 प्रतिशत तक अंक हासिल किए हैं। खेलकूद के कोच हैप्पी शर्मा और यमन दरलामी ने बताया कि ये छात्र-छात्राएं बास्केटबॉल, बैडमिंटन, खो-खो और शतरंज जैसे खेलों में प्रदेश और देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
खिलाड़ियों का क्रमवार प्रदर्शन
1. वंश गुप्ता
कक्षा: 12वीं
अंक: 88%
खेल: बास्केटबॉल (राष्ट्रीय स्तर)
उपलब्धि: मेरठ में आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभाग
प्रतिक्रिया: मैदान पर ज्यादा समय देने के बावजूद मैंने पढ़ाई के लिए निश्चित समय तय किया। खेल ने मुझे अनुशासन और टाइम मैनेजमेंट सिखाया, जिसकी वजह से दोनों क्षेत्रों में संतुलन बना सका।
2. देव चौहान
कक्षा: 12वीं
अंक: 81%
खेल: बैडमिंटन (राज्य स्तर)
उपलब्धि: राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी
प्रतिक्रिया: बैडमिंटन ने मुझे एकाग्रता और धैर्य सिखाया। मैच के दौरान जैसे फोकस बनाए रखते हैं, वही आदत पढ़ाई में भी काम आई और अच्छे अंक मिले।
3. सौम्या सिंह
कक्षा: 10वीं
अंक: 85%
खेल: खो-खो (राज्य स्तर)
उपलब्धि: नोएडा चैंपियनशिप में प्रतिभाग
प्रतिक्रिया: खेल से मुझे ऊर्जा और आत्मविश्वास मिलता है। जब भी थकान महसूस होती थी, खेल की भावना मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थी और पढ़ाई में मन लगता था।
4. दिव्यांश अग्रवाल
कक्षा: 10वीं
अंक: 95%
खेल: बास्केटबॉल (राज्य स्तर)
उपलब्धि: आगरा में आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभाग
प्रतिक्रिया: नियमित अभ्यास के साथ पढ़ाई को संतुलित रखना आसान नहीं था लेकिन मैंने रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ने की आदत बनाई। इसी निरंतरता ने अच्छे अंक दिलाए।
5. देव प्रताप शर्मा
कक्षा: 12वीं
अंक: 78%
खेल: बास्केटबॉल (राज्य स्तर)
उपलब्धि: मेरठ और बरेली प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग, बिना कोचिंग सफलता
प्रतिक्रिया: मैंने बिना कोचिंग के सिर्फ स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन में पढ़ाई की। खेल के साथ पढ़ाई करना मुश्किल था, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत से यह संभव हुआ।
6. नमन पटेल
कक्षा: 12वीं
अंक: 98.25%
प्रतिक्रिया: खेल ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया। परीक्षा के दौरान दबाव को संभालना आसान हो गया और मैं बेहतर प्रदर्शन कर सकी।
खेल: शतरंज (राज्य स्तर)
उपलब्धि: विज्ञान वर्ग में विद्यालय टॉपर
प्रतिक्रिया: शतरंज ने मुझे रणनीति बनाना और धैर्य रखना सिखाया। मैंने पढ़ाई को भी उसी तरह प्लान किया, जिससे टॉप करने में सफलता मिली।