बटेश्वर। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक मेला श्री बटेश्वरनाथ के आयोजन के लिए अपनी जमीनें देने वाले स्थानीय काश्तकारों का धैर्य अब जवाब दे गया है। वर्ष 2024-25 का मुआवजा न मिलने से नाराज किसानों ने जिला पंचायत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आगामी मेलों के बहिष्कार और विरोध की चेतावनी दी है।
क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि यह मेला दशकों से स्थानीय काश्तकारों की निजी जमीनों पर आयोजित होता आ रहा है। इस विशाल पशु मेले से जिला पंचायत को करोड़ों रुपये के राजस्व और आय की प्राप्ति होती है, लेकिन जिन किसानों के खेतों में यह मेला सजता है, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। प्रभावित काश्तकार शिवशंकर, गंभीर सिंह, शांतिलाल और भूरेलाल वर्मा ने आरोप लगाते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से उन्हें मुआवजे के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिला है। मेले के कारण उनके खेतों की फसल का चक्र प्रभावित होता है। मुआवजे के लिए बार-बार चक्कर काटने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके बकाए मुआवजे का जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो वे आगामी आयोजनों के लिए अपनी जमीन नहीं देंगे और मेले का कड़ा विरोध करेंगे।