कासगंज। सुन्नगढ़ी के किलौनी इलाके में गंगा कटान का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। तेजी से कटान होने से ग्रामीण भयभीत नजर आ रहे है। अब तक कई ग्रामीणों की दो सौ बीघा से अधिक खेती योग्य भूमि कटान की जद में आकर गंगा में समा चुकी है। प्रशासन से लगातार कटान रोकने के लिए पक्की ठोकरे बनवाने की मांग की जा रही है।
कई दिन से कटान की मार सुन्नगढ़ी किलौनी इलाके में चल रही है। खेत में बना भवन भी कटान का शिकार होकर गंगा में समा चुका है। मंगलवार को भी कटान तेजी से चलता रहा। किसान पूरे दिन खेतों के किनारे बैठकर टकटकी लगाए कटान का कहर देखते रहे, लेकिन बेबस किसान अपनी उजड़ती भूमि को बचाने का प्रयास भी नहीं कर पा रहे थे क्योंकि गंगा की धारा काफी तेजी से चल रही है। किलौनी के ग्रामीण रोहताश का भवन कटान की चपेट में आ गया। इसी तरह से ग्रामीण आनंद, अब्दुल मन्नान, सूरज पाल, नरेंद्र कुमार, पीतंबर और जगदीश की कृषि योग्य भूमि गंगा में समाती जा रही है। यदि कटान रोकने की कवायद सिंचाई विभाग ने नहीं की तो ग्रामीणों को काफी नुकसान होगा। कटान की स्थिति के बावजूद सिंचाई विभाग कोई कार्य शुरू नहीं कर सका है। जबकि ग्रामीण लगातार पत्थरों का बांध बनवाने की मांग उठा रहे हैं।
सिंचाई विभाग बनाए है नजर
कासगंज। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता संदीप जैन का कहना है कि उतरती गंगा की धारा से कटान होता है। अभी खेतों में कटान हो रहा है। सिंचाई विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अभियंताओं की टीम बुधवार को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेगी।
गंगा में नरौरा से और घटा पानी का प्रवाह
कासगंज। गंगा नदी में लगातार जलस्तर में उतार चढ़ाव हो रहा है। नरौरा से करीब 10 हजार क्यूसेक पानी का प्रवाह कम हुआ है, लेकिन हरिद्वार और बिजनौर बैराज से पानी के प्रवाह में आंशिक वृद्धि हुई है। मंगलवार को कछला ब्रिज पर जलस्तर स्थिर बना रहा।
बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 62912 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 49208 क्यूसेक
नरौरा बैराज से- 71077 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 161.98 मीटर के निशान पर