कासगंज। कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर मंगलवार को साल के आखिरी चंद्र ग्रहण का संयोग हुआ। जिले में ‘खूनी लाल रंग’ में रंगे चांद को देखने का अद्भत नजारा देखने को मिला। 43 मिनट तक ग्रहण का असर रहा। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता रही।
मंगलवार को शाम 5 बजकर 38 मिनट पर चंद्र ग्रहण लगा। इस दौरान चंद्रमा खूनी लाल रंग में नजर आया। चंद्र ग्रहण के नजारे पल पल बदलते रहे। धीरे धीरे ग्रहण का असर कम होने लगा और सांय 6 बजकर 21 मिनट पर चंद्रमा पूरी तरह से लालिमा लिए नजर आने लगा। चंद्रमा से ग्रहण की छाया हटने के बाद घरों, मंदिरों की सफाई का कार्य शुरू हो गया। सफाई के बाद लोगों ने स्नान आदि का कार्य किया। इसके बाद ही घरों में भोजन बन सका।
कासगंज। चंद्र ग्रहण के सूतक के चलते लोगों ने खाना आदि न बनाया और न खाया। शहर के माता चामुंडा मंदिर, प्रभुपार्क स्थित माता चामुंडा, माता संतोषी, मनकामेश्वर, शनि व गणेश मंदिर, गली बोहरान स्थित गोवर्धन नाथ मंदिर, बारहद्वारी स्थित हनुमान मंदिर सहित सभी देव मंदिरों के कपाट बंद रहे। सूतक के चलते घरों में भी लोगों ने पूजा अर्चना के कार्य नहीं किए।
कासगंज। चंद्रग्रहण देर शाम 5.38 बजे से शुरू हुआ, लेकिन सूतक सुबह नौ बजे से ही लग गया था। इसके चलते लोगों ने ग्रहण के असर आदि के बारे में पहले ही जानकारी कर ली। जिन राशियों पर ग्रहण का असर बताया गया उन राशि के लोगों ने पंडितों पुरोहितों से इसके उपाय भी पूछे। जब ग्रहण समाप्त हो गया उसके बाद बताए गए उपाय के अनुसार दान आदि के कार्य किए।