कासगंज। गन्ना उत्पादक किसानों का 35 करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि चीनी मिल पर बकाया है। यह बकाया बीते वर्ष का है। चीनी मिल के भुगतान न करने से किसान आर्थिक रुप से परेशान है। ऐसी स्थिति में जरूरतमंद किसानों ने चीनी मिल को गन्ना न देने का फैसला कर लिया है। किसान उत्पाद का नगद भुगतान प्राप्त होने के कारण गन्ना की फसल को चारे के रूप में बेचना शुरू कर दिए हैं।
जिले में इस बार 5300 हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब 9000 किसानों ने गन्ना की फसल को लगाया था। गन्ना किसान अभी तक चीनी मिल में फसल डालने के लिए कटाई का कार्य शुरू नहीं किये है। अधिकांश किसान पशु चारे के लिए गन्ना की कटाई कर रहें। क्योंकि किसान भुगतान न मिलने से नाराज है। अधिकांश किसानों ने चीनी मिल को फसल न देने का फैसला किया है। चीनी मिल के मालिक एवं प्रबंध तंत्र के अधिकारियों के खिलाफ चार दिन पूर्व केस दर्ज होने के बाद भी मिल प्रशासन द्वारा अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि गन्ना के बकाए मूल्य का भुगतान कब तक किया जाएगा। ऐसी स्थिति किसानों को परेशान कर रही है। सरकार द्वारा गन्ना मूल्य का निर्धारण 350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किया गया है, लेकिन किसान गन्ना पशु चारे में 300 रुपये प्रति क्विंटल में बेच रहे है। पशु चारे में गन्ना बेचने से किसानों को यह लाभ मिलता है कि पत्तियों सहित पूरा गन्ना बिकता है और भुगतान नकद प्राप्त होता है।
कासगंज। पशुपालक भी अपने पशुओं के लिए महंगे चारे के विकल्प के तौर पर गन्ना के चारे का विकल्प अच्छा मान रहे हैं क्योंकि 1400 रुपये प्रति क्विंटल भूसे की जगह उन्हें 300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना मिल रहा है। कुटी मशीन पर कुटी कराने के बाद पशुओं के लिए बेहतर चारा तैयार हो रहा है।
चीनी मिल पर किसानों का 35 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक का बकाया है। उनके बच्चों की पढ़ाई, परिवार के पोषण और खेतीबाड़ी की लागत के लिए पैसों की जरूरत है। बकाया मूल्य न मिलने से किसान परेशान हैं, वह गन्ने को चारे के रूप में बेचने लगे हैं। अशोक कुमार, सचिव, न्यौली गन्ना समिति