बाह। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर 16वीं सदी की पुरातात्विक विरासत अटेर किले के पुनरुद्धार की चर्चा तेज है। चंबल नदी और अटेर पुल के जुड़ाव से अब यह प्राचीन दुर्ग देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए ईको-टूरिज्म का नया केंद्र बनने जा रहा है।
महाभारत में जिस दुर्ग पहाड़ी का जिक्र है, उसी पर घने चंबल के बीहड़ में नदी क्षेत्र में 16 वीं सदी का अटेर किला बना है। 1644 में भदावर नरेश बदन सिंह ने किले का निर्माण शुरू कराया था। जिसे 1668 में राजा महासिंह ने पूरा कराया। पुरातात्विक विरासत की देखभाल करने वाले अशोक सिंह तोमर ने बताया कि किला पूर्व से पश्चिम तक 700 फीट एवं उत्तर से दक्षिण तक 325 फीट तक फैला है। इसमें 17 बुर्ज और चार प्रवेश द्वार हैं। किले के भवनों में सात मंजिला भवन प्रमुख है, बदन सिंह का महल, राजा का बंगला, रानी का बंगला, बारह खंबा महल इस किले के मुख्य आकर्षण हैं। पुरातत्व विभाग की देखरेख में किले के बाहरी मुख्य द्वार सतखंडा, दरबारे आम, हाथीखाना, दक्षिण की ओर स्थित भीतरी दीवार, भूमिगत गैलरी, सैय्यद गेट, किले के आंतरिक और बाहरी पार्श्व कक्ष आदि को उड़द की दाल, गोंद, सफेद सीमेंट के पेस्ट से एक-एक ईंट को करीब 3 साल से जोड़ा जा रहा है। चंबल सफारी जरार के निदेशक आरपी सिंह कहते हैं कि अटेर पुल के निर्माण से ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली, आगरा के रास्ते विदेशों से आने वाले पर्यटक घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए और चिड़ियां देखकर लौट जाते थे। अब किले का वैभव और इतिहास अटेर तक खींचकर ले जाएगा। बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि नंदगवा में ईको टूरिज्म का विकास हुआ है, सैलानी आते हैं। पुल बनने से ग्वालियर और भिंड के पर्यटक भी चंबल के ईको टूरिज्म की सैर करेंगे। जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
प्राचीनकाल से है घड़ियाल, कछुओं का चंबल से नाता
चंबल में घड़ियाल सेंक्चुअरी 1979 में बनी। लेकिन चंबल से घड़ियाल, कछुओं का प्राचीनकाल से नाता रहा है। अशोक सिंह तोमर बताते हैं कि किले के प्रवेश द्वार की छत पर राजाओं, फूल पत्तियों की चित्रकारी है। 16 वीं सदी में निर्मित किले के ऊपरी भाग की छतरी के मेहराव पर कंगूरों के स्थान पर घड़ियाल की आकृति है। दूसरी ओर सामने भवन पर कछुओं की कलाकृति बनी हुई है।
भदावर नरेश ने मोड़ी थी यमुना चंबल के बहाव की धार
1644 में राजा बदन सिंह ने अटेर किले के निर्माण के लिए चंबल की धार को घुमा दिया था। यहां आज भी चंबल नदी अंग्रेजी के ''''''''यू'''''''' आकार में बहती है। 1646 में बटेश्वर में यमुना की धार को भी यू आकार में मोड़ दिया था। घुमाव के लिए यमुना नदी पर बने एक कोस लंबे अर्द्ध चंद्राकार बांध पर 101 शिव मंदिर श्रंखला अवस्थित है, जो पर्यटकों को अचरज में डाल देती है।