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Agra News: चांदी के आभूषणों से होगा शृंगार, छप्पन भोग और फूलों से सजेगा दरबार

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सिद्धपीठ प्राचीन श्री गौरल भैरवनाथ मंदिर बाई पुर सिकंदरा
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आगरा। पौष मास की अमावस्या के प्रथम रविवार को सिद्धपीठ प्राचीन श्री गौरल भैरवनाथ मंदिर बाईपुर सिकंदरा में प्रति वर्ष मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार 21 दिसंबर को बाबा का वार्षिक मेला लगाया जाएगा।
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रंगरोगन के साथ मंदिर की भव्य सजावट से लेकर बाबा के शृंगार, छप्पन भोग के साथ भव्य फूल बंगला सजाने की तैयारियां भी लगभग पूर्ण हो चुकीं है। इस बार बाबा का चांदी के आभूषणों से शृंगार होगा और दिव्य छप्पन भोग के साथ सुगंधित पुष्पों का भव्य फूल बंगला सजेगा। मेले में विभिन्न प्रांतों से आने वाले श्रद्धालु अपने आराध्य को बेड़ई-कचौड़ी, इमरती के साथ मदिरा का भोग अर्पित कर पुण्यलाभ प्राप्त करेंगे।
महंत भूदेव गिरी गोस्वामी ने बताया कि भैरव बाबा का वार्षिक मेला 21 दिसंबर को लगेगा। इस दिन बाबा को चोला चढ़ाया जाएगा। चांदी के आभूषण से अलौकिक शृंगार के साथ बाबा को दिव्य छप्पन भोग अर्पित किए जाएंगे।
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मंदिर का इतिहास
महंत भूदेव गिरी गोस्वामी ने बताया कि उनकी आठवीं पीढ़ी श्री गौरल भैरवनाथ बाबा की सेवा कर रही है। मंदिर का इतिहास प्राचीन है। उनके मुताबिक औरंगजेब की सेना आगरा की सीमा पर जंगल में स्थित इस मंदिर को तोड़ने जा पहुंची। सैनिकों पर कभी मधुमक्खी हमला कर देती थीं, तो कभी बिच्छू और सांप निकल आते। जिस कारण सैनिकों को डरकर पीछे हटना पड़ा। मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर पहुंचकर बाबा को ललकार कर कहा कि यदि यह मंदिर दैवीय है, तो यहां विराजमान मूर्ति हिलकर दिखाए, उसी क्षण मूर्ति हिली और उसे देखकर औरंगजेब मंदिर के आगे नतमस्तक हो गया। यहां उसने धर्मशाला और बावड़ी का निर्माण कराया, जो अब भी मौजूद है।
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सिद्धपीठ प्राचीन श्री गौरल भैरवनाथ मंदिर बाई पुर सिकंदरा

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