राजस्थान की सबसे बड़ी सरकारी गोशाला (हिंगोनिया गोशाला, जयपुर) में एक जुलाई से अब तक लगभग 1500 गाय मर चुकी हैं। गनीमत है कि अपने शहर में ऐसे हालात नहीं हैं। यहां कोई सरकारी गोशाला तो नहीं है लेकिन विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से गोशालाएं संचालित हैं। यहां गायों को पेटभर खाना मुहैया कराया जा रहा है। हालांकि जयपुर की घटना के बाद से गोपालक और सचेत हो गए हैं। हालातों में और बेहतर बदलाव किया है। गायों को अनुकूल वातावरण दिया जा रहा है। खाने की गुणवत्ता के साथ ही चिकित्सकीय परीक्षण पर भी जोर है। जयपुर की घटना के बाद शहर में संचालित कई गोशालाओं की पड़ताल की गई। सभी की स्थिति संतोषजनक थी।
बल्केश्वर गोशाला
श्रीगोशाला सोसायटी द्वारा संचालित इस गोशाला में लगभग 650 गाय हैं। अधिकांश गाय स्वस्थ हैं। धूप और बारिश से बचाव के लिए टिन शेड हैं। पानी की उचित व्यवस्था है। सोसायटी के अध्यक्ष नवीन जैन का कहना है कि यह गोशाला लगभग 105 साल पुरानी है। गोशाला परिसर में स्थित अतिथिवन होटल की शतप्रतिशत आय और अग्रवन की आय के 75 फीसदी हिस्से से गायों की सेवा की जाती है।
एसपीसीए गोशाला
यह गोशाला एसपीसीए द्वारा संचालित है। इसमें लगभग 80 गाय हैं। हरा चारा परिसर में ही उगाया जाता है। भूसे और दाने की पर्याप्त व्यवस्था है। संस्था की कृष्णा भल्ला के अनुसार, सामाजिक सहयोग से गोशाला संचालित होती है। गायों की देखभाल के लिए ग्वालों के अलावा चिकित्सक की भी व्यवस्था है।
वनखंडी गोशाला
गैलाना गांव में वनखंडी मंदिर परिसर में स्थित इस गोशाला में लगभग 220 गाय हैं। इसमें एकाध गाय की हालत ठीक नहीं थी। संस्था के अध्यक्ष निरंजन सिंह के अनुसार, किसी तरह का कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलता है। गायों के लिए हमेशा भूसा और दाना पर्याप्त मात्रा में रहता है।
श्रीकृष्ण गोशाला
यह गोशाला शाहगंज में है। यहां लगभग 350 गाय हैं। गोशाला की देखरेख करने वाले कर्मचारी का कहना है कि एक बार जो गाय गोशाला में आ जाती है, फिर उसे छोड़ा नहीं जाता। उसकी पूरी जिम्मेदारी गोशाला की होती है।
प्लास्टिक खाने को मजबूर गाय
खुले में घूमने वाली गायों को उचित आहार नहीं मिल पाता। ऐसे में वे कूड़े में से प्लास्टिक आदि खाने को मजबूर हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गायों के मरने का एक कारण अधिक प्लास्टिक (पॉलिथीन) खाना भी बताया था। ताजनगरी में पॉलिथीन के खिलाफ कई बार अभियान छिड़ चुका है लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है।
कमला नगर में गायों के
एकत्रित होता है भोजन
गोसंवर्धन समिति द्वारा कमला नगर में दो रिक्शे चलाए जा रहे हैं। ये हर सुबह प्रत्येक घर से गायों के लिए भोजन एकत्रित करते हैं। समिति के महामंत्री प्रदीप अग्रवाल के अनुसार, एक रिक्शा नटराजपुरम, ब्रज विहार, प्रेमानंदकुंज और बालाजी नगर में भ्रमण करता है तो दूसरा कमला नगर एफ और डी ब्लॉक में। अगले रविवार से एक और रिक्शा चलाया जाएगा। यह बी ब्लॉक से कावेरी मंदिर तक के क्षेत्र को कवर करेगा।