पश्चिमी यूपी में लगातार बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं ने ग्राम पंचायत चुनाव की चुनौती बढ़ा दी है। राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल का कहना है कि सांप्रदायिक तनाव की दृष्टि से चुनाव में पूरे वेस्ट यूपी को संवेदनशील माना गया है। इसके मद्देनजर सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त किए जा रह हैं। पैरा मिल्ट्री फोर्स भी लगाया जाएगा।
वे शुक्रवार को डीजीपी जगमोहन यादव, प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा और एडीजे कानून व्यवस्था दलजीत चौधरी के साथ आगरा और अलीगढ़ मंडल की चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए आए थे। सर्किट हाउस में लगभग तीन घंटे चली समीक्षा बैठक के बाद दोपहर 2:30 बजे पत्रकारों से रूबरू उन्होंने बताया कि मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़ और आगरा मंडल को सांप्रदायिक तनाव की दृष्टि से संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
इसके अलावा आगरा जोन में चुनावी गड़बड़ी के मामलों में एटा, मैनपुर और मथुरा में सतर्कता बढ़ाए जाने की जरूरत है।
हालांकि केंद्र से अर्द्धसैनिक बल ज्यादा नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि 423 कंपनियां मांगी गई थी, जबकि मिल पाई हैं सिर्फ 40 ही। इससे पूर्व समीक्षा में एटा को सर्वाधिक संवेदनशील माना गया।
जिला एवं क्षेत्र पंचायत चुनाव में पूरे प्रदेश में 65 री-पोल हुए। इनमें से अकेले एटा में 35 रहे। आयोग के निर्देश पर यहां से तत्कालीन एसपी को भी हटाया गया था। इस दौरान आगरा और अलीगढ़ मंडल के सभी आला पुलिस प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। उधर, प्रेसवार्ता में डीजीपी ने कहा कि ग्राम पंचायत चुनाव में खुराफातियों पर बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी।