आगरा। भारतीय जूनियर हॉकी टीम के विश्व कप में कांस्य पदक जीतने को पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान जगबीर सिंह ने देश की हॉकी यात्रा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी असर वाला कदम बताया। खास बातचीत में उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को केवल पदक के रंग तक नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे भारतीय हॉकी के भविष्य की मजबूत बुनियाद के रूप में समझना जरूरी है।
जगबीर सिंह ने कहा कि ओलपिंक पदक विजेता श्रीजेश की कोच के तौर पर यह पहला इम्तिहान था, जिसमें वे खरे उतरे। इससे पहले वर्ष 2016 के जूनियर वर्ल्ड कप में पदक जीतने वाली भारतीय टीम के कई खिलाड़ी आज सीनियर टीम में देश का नाम रोशन कर रहे हैं और बड़ी प्रतियोगिताओं में निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं।
पूर्व कप्तान के अनुसार, मौजूदा जूनियर टीम में भी वही जज्बा, अनुशासन और तकनीकी समझ नजर आ रही है, जो आने वाले वर्षों में भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई खेलों और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर मजबूती दे सकती है। जूनियर स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन का सीधा असर सीनियर टीम की गहराई और मजबूती पर पड़ता है। जूनियर स्तर पर पदक का स्वाद चखने के बाद खिलाड़ियों की मेडल की भूख और बढ़ जाती है। कहा कि भारतीय सीनियर हॉकी टीम 1975 के बाद से विश्व कप में पदक जीतने में सफल नहीं हो पाई है, लेकिन जूनियर टीम ने नौ साल के भीतर ही यह दोहरा दिया। जूनियर टीम की सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा मौजूद है, जरूरत है तो उसे सही दिशा, निरंतर अवसर और अनुभवी मार्गदर्शन की। अगर जूनियर खिलाड़ियों को समय पर सीनियर टीम से जोड़ा जाए और उन्हें बड़े मुकाबलों का अनुभव दिलाया जाए, तो आने वाले वर्षों में भारतीय हॉकी फिर से विश्व स्तर पर अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकती है। अंत में उन्होंने कहा कि यह कांस्य पदक केवल एक टूर्नामेंट की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारतीय हॉकी के उज्ज्वल भविष्य की दस्तक है, जो आने वाले समय में देश को बड़े मंचों पर गर्व के पल दे सकती है।