कैंजराघाट पर पांटून पुल तैयार, जल वृद्धि से डूबा पहुंच मार्ग
बाह। मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना के उद्योतगढ़ गांव एवं उत्तर प्रदेश के बाह, आगरा के कैंजरा गांव के बीच चंबल नदी पर 3 महीने की देरी से बने पीपों के पुल पर बुधवार सुबह आवागमन शुरू हुआ, तो लोगों ने राहत की सांस ली। दोपहर में चंबल नदी के जलस्तर में महज एक फीट की वृद्धि से पीपों के पुल का पहुंच मार्ग डूब गया। चार पहिया वाहनों का निकलना बंद हो गया। दो पहिया वाहन चालक एवं पैदल राहगीर भी जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं।
कैंजराघाट का पांटून पुल 15 अक्टूबर को बनना था। पीडब्ल्यूडी ने पुल निर्माण की वन विभाग से देरी से अनुमति ली। नतीजतन समय पर पुल का निर्माण नहीं हो सका। पुल का निर्माण पूरा होते ही बुधवार सुबह आवागमन शुरू हो गया। दोपहर तक आवागमन करने वालों की पुल निर्माण की खुशी मायूसी में बदल गई। एक फीट जलस्तर बढ़ने से पुल का पहुंच मार्ग डूब गया। दलदल के हालात पैदा हो गये। भिंड, मुरैना, आगरा, फिरोजाबाद के 150 गांवों के लोग कैंजराघाट के पीपों के पुल पर आश्रित हैं। पहुंच मार्ग डूबने से पैदा हुए दलदल और फिसलन के हालातों के बीच पैदल और दो पहिया वाहन चालक ही जान जोखिम में डाल कर निकल पा रहे हैं। भाजपा कोर कमेटी के सदस्य पवन भदौरिया, चमरौआ के सुरेश पचौरी, पुरा भदौरिया के कृष्णकांत भदौरिया, नगरा के आनंद तोमर, रिषी तोमर, आकाश, सिलावली के राकेश सिंह, अजय सिंह, निरोत्तम सिंह, गनपति आदि ने पीपों के पुल के निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। पुल को दुरुस्त कर आवागमन सुचारू कराने की मांग की है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार चंद्रसेन तिवारी ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से दिक्कत हुई। पहुंच मार्ग पर मिट्टी डलवा कर दुरुस्त कराया जा रहा है। लोहे की चादर बिछाई जाएगी, जिससे चार पहिया वाहन भी सुगमता से निकल सकें।