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फ्लैट में मिला थाईलैंड की युवती का शव, आखिरी इच्छा के साथ सुसाइड नोट में लिखा- आई लव यू आगरा

Wed, 15 Jan 2020 10:49 AM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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बेड पर पड़ा युवती का शव - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के ताजगंज क्षेत्र में फतेहाबाद रोड स्थित हेरिटेज अपार्टमेंट में किराए पर रहने वाली थाईलैंड की युवती का शव मंगलवार की सुबह फ्लैट में ही बेड पर मिला। बदबू आने पर आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस दरवाजा तोड़कर फ्लैट में घुसी। 

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शव के पास कुछ गोलियां पड़ी थीं, बेड पर ही सुसाइड नोट था। इसकी पहली लाइन में लिखा है, नो मनी, नो जॉब, नो फैमिली। पुलिस का कहना है कि मामला आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या का लग रहा है। युवती ताजगंज के ही स्पा सेंटर में ट्रेनर थी। सेंटर बंद हो जाने से ढाई महीने से बेरोजगार थी।

थाईलैंड की अंचली कासी (43) 2018 में आगरा आई थी। ताजगंज पुलिस को आसपास के लोगों ने बताया कि वो काफी दिनों से फ्लैट से बाहर नहीं निकली थी। पुलिस का कहना है कि उसने सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि स्पा सेंटर बंद हो जाने के कारण कई युवतियां बेरोजगार हो गई हैं। वो भी उनमें से एक है।

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मृतका के परिवार से संपर्क कर रही पुलिस

ताजगंज के थाना प्रभारी निरीक्षक अनुज मलिक ने बताया कि शव के पास ही कुछ गोलियां पड़ी थीं लेकिन रैपर नहीं था। बेड के ऊपर सिगरेट का पैकेट भी था। फोरेंसिक एक्सपर्ट ने मौका मुआयना किया है।

शव को तीन दिनों तक पोस्टमार्टम हाउस में रखा जाएगा। अगर इस बीच परिवारीजन आ जाते हैं तो उन्हें सौंप दिया जाएगा, वरना पुलिस ही दाह संस्कार कराएगी। पासपोर्ट से जानकारी लेकर उसके परिवारीजनों से संपर्क की कोशिश की जाएगी।

शव को जला देना, अस्थियां यमुना में बहा देना

अंचली ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वो अब जीना नहीं चाहती है। उसके मृत शरीर को जलाया जाए, अस्थियों को यमुना में प्रवाहित किया जाए, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिल सके। 

जानलेवा है अकेलापन.... हर पांचवां इंसान है शिकार
अकेलापन जानलेवा है, देश में हर पांचवां इंसान इसका शिकार है। कोई थोड़े समय के लिए, तो कोई ज्यादा। कोई इस अवस्था से बाहर आ जाता है ,तो कोई जिंदगी गवां बैठता है।

इसका उपचार संभव है, सात दिन में ही मरीज ठीक हो सकता है लेकिन विडंबना यह है कि उदासी को लोग बीमारी समझते ही नहीं। यह कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर का।

उन्होंने बताया कि इस पर स्टडी हो चुकी हैं। देश में 20 फीसदी लोग उदासी की बीमारी के शिकार हैं। ऐसा मानिए कि यह खांसी - जुकाम की तरह कॉमन बीमारी बन चुकी है।

1. कोई बहकी बहकी बातें करे तो समझ जाइए उदास है ( ऐसे पहचानें उदासी के मरीज को )
कुछ अच्छा नहीं है इस दुनिया में, हर तरफ तबाही मची हुई है.... मुझे तो कुछ अच्छा ही नहीं लगता.... लंबी उम्र लेकर क्या करूंगा, मैं तो अपने अंग भी दान कर जाऊंगा.... तो समझ जाइए कि वह उदासी की बीमारी का शिकार हो चुका है। उसे अकेला रहने अच्छा लगेगा। वह लोगों का सामना करने से बचेगा। उसे तेज आवाज से चिड़चिड़ाहट होगी, ये भी लक्षण है।

भूख न लगे, शौक पूरे करने का मन न हो... तो खतरा ( खुद भी पहचान सकते हैं )
अगर आपको भूख लगनी कम हो गई है, कुछ दिन पहले तक जो आपके शौक थे, वे अब अच्छे नहीं लगते तो समझ जाइए कि खतरे की घंटी बज चुकी है। आपको अकेले में रहना अच्छा लगे, तो यह भी एक लक्षण है। आपको उपचार की जरूरत है।

साथी हो, तो पीड़ा खत्म हो जाती है (अकेले रहने से बढ़ता है मर्ज )
अगर उदासी का मरीज अकेला रहे तो उसका मर्ज और बढ़ जाता है। उसका कोई साथी है, परिवार है, और वह उसके सामने अपना दर्द बयां कर दे, तो उदासी की बीमारी से जो पीड़ा हो रही है, वह नहीं होगी। बीमारी रहेगी लेकिन यह बढ़ेगी नहीं, आत्महत्या की नौबत नहीं आएगी, क्योेंकि बीमारी से ज्यादा खतरनाक है उसकी पीड़ा। संवाद से तनाव कम होता है।
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दुखी हैं, तो रोइए, मन हल्का होगा
चिकित्सक कहते हैं कि अगर  कोई शख्स दुखी है, वह किसी अपने के सामने रो दे तो भी राहत मिलती है, मन हल्का होता है। वह अगर किसी बात से परेशान है, उसे दोस्त, परिजन को बता दे, तो भी राहत मिलती है।

जानलेवा अकेलापन
1. दो महीने पहले नाई की मंडी में एक कमरे में रहने वाले पिता-पुत्र की मौत हो गई। वे किसी से वास्ता नहीं रखते थे।
2. दो साल पहले शाहगंज में महिला और फिर उसकी बेटी की मौत हो गई। वे दोनों भी किसी से वास्ता नहीं रखतीं थीं।
3. जुलाई 2027 में ताजगंज में अकेले रह रहे परिवहनकर्मी ने सुसाइड कर लिया था। सुसाइड नोट में लिखा था, अब जीने की इच्छा खत्म हो गई है।
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