इन पत्रों के आधार पर ही लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड जारी हो रहे हैं। जिले में 12 घरों से पत्र लौट आए हैं। बताया गया है कि सूची में शामिल पते पर लाभार्थी नहीं मिले। बड़ी संख्या में पत्र वापस होने से स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लाभार्थी परिवारों का सत्यापन शुरू करा दिया है। आशा कार्यकर्ताओं से कराए जा रहे सत्यापन में जो परिवार निर्धारित पते पर नहीं मिलेंगे उनके नाम सूची से हटा दिए जाएंगे।
77 हजार के ही बने गोल्डन कार्ड
जिले में एक लाख 10 हजार 546 परिजनों को सरकार की ओर से लाभार्थी पत्र जारी किया था। इसके आधार पर लोगों को गोल्डन कार्ड जारी किए जा रहे हैं। अभी तक जिले में सिर्फ 77 हजार तीन सौ परिवारों के ही गोल्डन कार्ड बने हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है जिनके पास पत्र पहुंच गए हैं, वह गोल्डन कार्ड बनवा लें। जरूरत पड़ने पर तत्काल गोल्डन कार्ड जारी नहीं होगा और योजना के तहत इलाज में समस्या पैदा होगी।
करीब 12 हजार लाभार्थी परिवार सूची में दर्ज पते पर नहीं मिले हैं। इस कारण पुन: सत्यापन कराया जा रहा है। इस काम में आशाओं की मदद की जा रही है। जिन लाभार्थियों का सत्यापन नहीं होगा उनकी सूची शासन को भेज दी जाएगी। - डॉ. सुनील पांडेय, जिला कार्यक्रम समन्वयक आयुष्मान भारत