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मोदी-योगी की चिट्ठी 12 हजार घरों से लौटी, पते पर नहीं मिले लाभार्थी, अब ढूढ़ रहा प्रशासन

Wed, 15 Jan 2020 07:01 AM IST
मुकेश कुमार नीलेश शर्मा, अमर उजाला, मैनपुरी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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मैनपुरी जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आयुष्मान के लाभार्थियों को भेजी गई चिट्ठी 12 हजार घरों से लौट गई है। इसकी वजह है चिट्ठी पर जो पते लिखे थे, वहां आयुष्मान योजना के लाभार्थी मिले ही नहीं। 
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बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पत्र वापस लौटने पर स्वास्थ्य विभाग ने लाभार्थी परिवारों की तलाश शुरू कर दी है। सत्यापन की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। सत्यापन के बाद भी इन परिवारों को योजना का लाभ मिल पाएगा।
 
आयुष्मान भारत के तहत लाभार्थी परिवारों का चयन सोशियो ईकोनॉमिक कास्ट सेंसस 2011 (एसईसीसी) सूची के आधार पर किया गया था। जिले में करीब एक लाख 10 हजार 546 लाभार्थी परिवारों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से पत्र जारी किए। 
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इन पत्रों के आधार पर जारी हो रहे गोल्डन कार्ड

इन पत्रों के आधार पर ही लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड जारी हो रहे हैं। जिले में 12 घरों से पत्र लौट आए हैं। बताया गया है कि सूची में शामिल पते पर लाभार्थी नहीं मिले। बड़ी संख्या में पत्र वापस होने से स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। 

स्वास्थ्य विभाग की ओर से लाभार्थी परिवारों का सत्यापन शुरू करा दिया है। आशा कार्यकर्ताओं से कराए जा रहे सत्यापन में जो परिवार निर्धारित पते पर नहीं मिलेंगे उनके नाम सूची से हटा दिए जाएंगे। 
 
77 हजार के ही बने गोल्डन कार्ड 

जिले में एक लाख 10 हजार 546 परिजनों को सरकार की ओर से लाभार्थी पत्र जारी किया था। इसके आधार पर लोगों को गोल्डन कार्ड जारी किए जा रहे हैं। अभी तक जिले में सिर्फ 77 हजार तीन सौ परिवारों के ही गोल्डन कार्ड बने हैं। 
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है जिनके पास पत्र पहुंच गए हैं, वह गोल्डन कार्ड बनवा लें। जरूरत पड़ने पर तत्काल गोल्डन कार्ड जारी नहीं होगा और योजना के तहत इलाज में समस्या पैदा होगी। 
 

करीब 12 हजार लाभार्थी परिवार सूची में दर्ज पते पर नहीं मिले हैं। इस कारण पुन: सत्यापन कराया जा रहा है। इस काम में आशाओं की मदद की जा रही है। जिन लाभार्थियों का सत्यापन नहीं होगा उनकी सूची शासन को भेज दी जाएगी। - डॉ. सुनील पांडेय, जिला कार्यक्रम समन्वयक आयुष्मान भारत

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