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UP: हाईकोर्ट की 'रेप नहीं' वाली टिप्पणी पर रोक, दो साल से दहशत में थी किशोरी, परिजनों को जगी न्याय की उम्मीद

Thu, 27 Mar 2025 11:20 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज

सार

कासगंज की एक वारदात के मामले में  हाईकोर्ट ने कहा था कि निजी अंग पकड़ना, नाड़ा खोलने की कोशिश करना दुष्कर्म की कोशिश नहीं है। इस आदेश पर रोक लगा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की रोक और तल्ख टिप्पणी के बाद अब किशोरी के परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। 
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court new - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कासगंज की एक किशोरी के मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि निजी अंग पकड़ना, नाड़ा खोलने की कोशिश करना दुष्कर्म की कोशिश नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की रोक और तल्ख टिप्पणी के बाद अब किशोरी के परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। क्योंकि घटना के बाद अश्लील हरकत व दुष्कर्म की कोशिश का शिकार होने वाली किशोरी इतनी दहशत में आ गई कि वह दो वर्ष तक घर से नहीं निकली। किशोरी की यह स्थिति देखकर माता-पिता व परिवार के लोग काफी परेशान थे, क्योंकि पुलिस उनकी सुन नहीं रही थी। 
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ऐसे में उन्होंने जनपद न्यायालय में विशेष पॉक्सो अदालत की शरण ली। माता-पिता ने मामले की पूरी तरह से पैरवी की। समय से साक्ष्य न्यायालय को दिए। गवाहों के बयान दर्ज कराए। परिवार के लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। गांव में स्थित उनका घर भी कमजोर आर्थिक स्थिति बयां करता है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद से परिवार के लोग इस बात से आहत थे कि अब उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा और वे इसके लिए पैरवी में जुटे थे। माता पिता अभी भी गांव में नहीं हैं। गांव में उनके परिवार के अन्य सदस्यों व ग्रामीणों ने बताया कि वह दिल्ली गए हुए हैं। परिवार के लोगों के पास एक-एक बीघा जमीन है। कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद माता-पिता का किशोरी को न्याय दिलाने का संघर्ष मिसाल बन रहा है।

 

चाची बोलीं-जमीन बिक जाए पर न्याय पाकर रहेंगे
सिढ़पुरा थाना क्षेत्र में पीडि़त किशोरी का गांव है। उसके गांव में मीडियाकर्मी भी पहुंचे तो लोगों को मामले की विस्तृत जानकारी नहीं थी। उनसे बातचीत की गई तो परिवार के लोग और गांव के लोगों ने घटनाक्रम के बारे में बताया। किशोरी की चाची ने यहां तक कहा कि चाहे उनके परिवार की जो थोड़ी बहुत जमीन है वह भी बिक जाए लेकिन वह न्याय पाकर रहेंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना की और न्याय की उम्मीद जताई।

 

पुलिस ने नहीं सुनी तो ली न्यायालय की शरण
घटना क्रम के मुताबिक, 10 नवंबर 2021 को किशोरी जब अपनी मां के साथ अपने गांव जा रही थी तभी दो जानकार युवकों ने किशोरी को गांव तक छोड़ने के बहाने अपनी बाइक पर बैठा लिया था। बाइक पर किशोरी को अपने साथ ले जाने वाले युवक पवन निवासी ब्रिसिंगपुर, आकाश निवासी उतरना ने सरावल से खजुरा मार्ग पर पुलिया के पास बाइक रोक ली और 14 वर्षीय किशोरी के साथ अश्लील हरकत की। किशोरी की सलवार का नारा तोड़कर दुष्कर्म की कोशिश की। तभी रास्ते से निकले कुछ लोगों ने युवकों को टोका। आरोपी तमंचा दिखाकर उन्हें भयभीत कर भाग गए। किशोरी ने जब अपनी व परिजनों को मामले की जानकारी दी। मामला सिढ़पुरा थाने पहुंचा, लेकिन पुलिस ने मामले की प्राथमिकी दर्ज नहीं की। कई दिन तक परिवार के लोग चक्कर लगाते रहे और पुलिस टहलाती रही। परिवार के लोगों ने एसपी सहित अन्य अधिकारियों को रजिस्ट्री डाक से शिकायत भेजी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद परिवार के लोग न्यायालय की शरण में पहुंचे। किशोरी की मां ने न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉॅक्सो एक्ट के यहां 12 जनवरी 2022 को दंड संहिता की धारा 156/3 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया।

 
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न्यायालय ने इसका परिवाद 21 मार्च 2022 को दर्ज कर लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई चली। किशोरी की मां ने घटना से जुड़े साक्ष्य न्यायालय को दिए। गवाहों के बयान हुए। 23 जून 2023 को न्यायालय ने दुष्कर्म की धारा 376, पॉक्सो एक्ट की धारा 18, धारा 504, 506 के अंतर्गत आरोपी पवन व आकाश को न्यायालय में तलब किया। न्यायालय के तलवी आदेश के बाद आरोपी हाईकोर्ट की शरण में चले गए।
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