कोर्ट में डॉक्टर ने पीड़िता के मेडिकल में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की। अदालत में पीड़िता, उसके पति और गवाह भी अपने पूर्व कथनों से मुकर गए। इस पर कोर्ट ने पीड़िता, उसके पति और एक गवाह पर झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने पर कानूनी कार्रवाई के आदेश दे दिए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट 1 के एडीजे यशवंत कुमार सरोज ने साक्ष्य के अभाव में 10 वर्ष पहले दर्ज दुष्कर्म और धमकी के मामले में टेंट व्यवसायी जितेंद्र उर्फ जीतू को दोषमुक्त माना है। पीड़िता, उसके पति और एक गवाह पर झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने पर कानूनी कार्रवाई के आदेश दे दिए।
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थाना जगदीशपुरा में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उनके पति की टेंट हाउस के संचालक जितेंद्र से दोस्ती थी। 15 फरवरी 2016 की दोपहर पति की गैर-मौजूदगी में आरोपी जितेंद्र घर आया। मौका पाकर पीड़िता को दबोच लिया। मुंह में कपड़ा ठूंसकर और हाथ बांधकर दो बार दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई।
अदालत में पीड़िता, उसके पति और डॉक्टर सहित सात गवाह पेश हुए थे। डॉक्टर ने पीड़िता के मेडिकल में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की थी। अदालत में पीड़िता, उसके पति और गवाह भी अपने पूर्व कथनों से मुकर गए। पीड़िता ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि पैसों के लेन-देन के विवाद के कारण ही प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोपी ने उसके साथ कोई गलत कार्य नहीं किया था। अदालत ने गवाही से मुकरने पर पीड़िता, उसके पति और गवाह के विरुद्ध अलग-अलग विधिक कार्रवाई करने का आदेश दिया है।