तनाव लोगों के हृदय गति को अनियमित कर रहा है। इनमें हार्ट अटैक का खतरा दो गुना रहता है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में हुए कार्डिनोवा-2019 में चिकित्सकों ने 30-35 साल की आयु होने पर बीपी, मधुमेह, कॉलेस्ट्रोल की जांच कराने पर जोर दिया।
एम्स की इलेक्ट्रो साइकोलॉजिस्ट डॉ. अपर्णा जायसवाल ने कहा कि तनाव से धड़कनें कम-ज्यादा होने से खून के थक्के जमते हैं। इससे हार्ट अटैक, हार्ट फेल और मस्तिष्काघात का खतरा है। 25-35 साल की आयु के युवाओं में धड़कन अनियमित होने के भी मरीज सामने आ रहे हैं।
दिल्ली के डॉ. मनीष बंसल ने इकोकार्डियोग्राफी को जरूरी बताया। इससे हृदय की आंतरिक दीवारें, वॉल्व, पंपिंग क्षमता की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। इससे हार्ट फेल की आशंका पर इलाज शुरू किया जा सकता है।
कार्डिनोवा-2019 में चिकित्सक
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डॉ. बीके मोहंती ने अपने व्याख्यान में हार्ट सर्जरी की नई विधियों के बारे में जानकरारी दी। कांफ्रेंस के समापन पर सभी चिकित्सकों को प्रमाण पत्र दिए गए। इसमें क्लीनिकल एक्सीलेंस अवार्ड ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. राजीव उपाध्याय, डॉ. तरुण सिंघल और डॉ. राजीव अग्रवाल को दिया गया।
संयोजक डॉ. सीआर रावत ने सभी का आभार जताया। डॉ. वीनेश जैन, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. ईशान गुप्ता, डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. राजकुमार गुप्ता ने भी व्याख्यान दिए।
एक दवा-एक राष्ट्र का बनाया प्रस्ताव
इंडियन कॉर्डियोलॉजी सोसाइटी ने कांफ्रेंस में हृदय की दवाओं की एक ही कीमत तय करने का प्रस्ताव भी बना। इसमें हृदय की दवाओं की कीमत समान रखने, यहां तक कि डोज बढ़ने पर भी कीमत एक ही रहे, इससे मरीज का इलाज प्रभावित नहीं होगा। महंगी दवाएं होने से मरीज नियमित दवाएं नहीं लेते हैं।
नमक, चीनी, तेल कम खाने को देंगे संदेश
हृदय रोग के बढ़ते मरीजों को देखते हुए सोसाइटी सेव हार्ट का मिशन भी चलाएगी। लोगों को नमक, तेल और चीनी का उपयोग कम से कम करने और बेहतर फिटनेस के लिए जागरूक करेंगे। हृदय रोग विशेषज्ञ अपने शहर में जागरूकता रैली निकालने के साथ निशुल्क शिविर के लिए भी प्रेरित किया है।