मैनपुरी। वर्ष 2009 के बहुचर्चित अपहरण और दुष्कर्म मामले में एडीजे-4 जहेंद्र पाल सिंह की कोर्ट ने मुकदमे के एक आरोपी को दोषी करार देते हुए दस साल की कैद और 25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। दो अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।
मामला 22 दिसंबर 2009 का है। कुरावली थाना क्षेत्र के सिरसा गांव के एक व्यक्ति ने अपनी 16 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनकी बेटी घर से सोने-चांदी के गहने और 50,000 रुपये लेकर गायब हो गई है। तलाश के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि उनकी बेटी को शेरा धीमर, कुंवरपाल और राजू ले गए हैं।
पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया और जांच के बाद किशोरी को बरामद किया। आरोपी शेर सिंह उर्फ शेरा धीमर के खिलाफ दुष्कर्म और अपहरण की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की गई। 3 सितंबर 2012 को कोर्ट ने पुलिस जांच में शामिल कुंवरपाल और राजू को भी अपहरण की धारा में तलब किया।
कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से पुष्पेंद्र दुबे ने सबूत और गवाह पेश किए। इनके आधार पर कोर्ट ने शेर सिंह उर्फ शेरा धीमर को दुष्कर्म का दोषी पाया। जबकि, कुंवरपाल और राजू को बरी कर दिया गया। शेर सिंह की सजा पर शनिवार को सुनवाई हुई। अदालत ने उसे 10 साल की कैद और 25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।