भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर करीब दस करोड़ का खर्च आया है। इसमें एक करोड़ का खर्च तो श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ही हुआ है। जबकि वृंदावन के श्री बांकेबिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर और राधामण मंदिर पर लाइटिंग में ही लाखों का खर्च है। वहीं, प्रसाद से लेकर व्यवस्था बनाने तक का व्यय जोड़ा जाए तो जिले के सभी बड़े मंदिरों पर पच्चीस से तीस लाख का खर्च आ रहा है।
भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए करीब 34 लाख लोग पहुंचे थे। यह आंकड़ा वह है जो प्रशासन ने शासन को भेजा था। 14 अगस्त को कृष्ण भक्त मथुरा पहुंचे और 16 को इनकी वापसी हुई। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 10 लाख रुपये तो लाइटिंग और साउंड पर ही खर्च हुए हैं, जबकि 80 कुंतल फलाहार वाला प्रसाद बना और 25 कुंतल अन्य प्रसाद । 55 किलो चांदी की गाय अभिषेक के लिए आई थी। इसकी कीमत ही 25 लाख होगी। जन्मस्थान संस्थान पर करीब एक करोड़ का खर्च माना जा रहा है।
उधर, द्वारिकाधीश मंदिर पर भी दस से बीस लाख का खर्च आया है। जबकि वृंदावन में श्री बांकेबिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिन, राधारमण मंदिर, राधादामोदर मंदिर, प्रियाकांत जू मंदिर, अक्षय पात्र और चंद्रोदय मंदिर। इन सभी मंदिरों में जन्माष्टमी पर सजावट से लेकर ठाकुरजी के प्रसाद तक पर बीस से तीस लाख का खर्च हुआ है। जबकि गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव और गोकुल के मंदिरों में भी पांच से दस लाख का खर्च आया है। मथुरा के प्रमुख मंदिरों के साथ जन्माष्टमी मथुरा के पांच हजार मंदिरों में मनाई गई थी।