परिषदीय स्कूलों से शिक्षक-शिक्षिकाओं के नदारद रहने की खबरों के बीच बाह के बिजौली गांव के शिक्षक गयाप्रसाद ने एक मिशाल कायम की है। रिटायर्ड हुए तीन साल हो गये लेकिन फिर भी बिना पगार के स्कूल में पढ़ाने के लिए नियमित जा रहे हैं। कहते हैं कि बिना स्कूल जाये उन्हें नींद भी नहीं आती।
बाह के बिजौली गांव के गयाप्रसाद शाक्य (65) 2013 में जूनियर हाईस्कूल सिलपौली से रिटायर्ड हुये थे। तब से वह कभी सिलपौली, कभी चौसिंगी तो कभी हिंगोटखेड़ा के स्कूल में पढ़ाने पहुंच जाते हैं। शनिवार को वे बच्चों को मीना की दुनिया रेडियो कार्यक्रम सुनवाते मिले। रिटायर्ड होने के बाद भी स्कूल क्यों के सवाल पर उन्होंने कहा कि स्कूल में पढ़ाये बिना उन्हें रात को नींद नही आती है। दिन में घर पर बेचैनी सी होती है। जब तक शरीर साथ दे रहा है तब तक स्कूल जाते रहेंगे। गयाप्रसाद के जज्बे से बाह ब्लाक के परिषदीय स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकायें बेहद प्रभावित हैं। बिना वेतन के रोजाना स्कूल में पढ़ाना किसी त्याग से कम नहीं है। प्राथमिक शिक्षक संघ बाह के ब्लाक अध्यक्ष राजेश पांडेय, अजीत नरवरिया, मनीषा यादव के अलावा उनके साथ काम कर चुके मलखान सिंह, बनवारीलाल, राजेश कुमार, संध्या चतुर्वेदी आदि ने गयाप्रसाद को सलाम किया है।