आगरा में बीईओ का तबादला रोकने के लिए विभागीय रिकॉर्ड में शिक्षक कर्ण सिंह धाकड़ को बीईओ दर्शाकर वाराणसी तबादला सूची में शामिल करने का मामला सामने आया है। विवाद बढ़ने पर संशोधित सूची जारी कर शिक्षक का नाम हटा दिया गया, जबकि लंबे समय से तैनात दो बीईओ अब भी जिले में बने हुए हैं।
आगरा में लंबे समय से जमे खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) का तबादला रोकने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग में गजब खेल कर दिया गया। विभागीय रिकॉर्ड में नगर क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय नाई की मंडी में तैनात शिक्षक कर्ण सिंह धाकड़ को बीईओ दर्शा दिया गया। रिकॉर्ड के आधार पर उनका तबादला आगरा से वाराणसी में बीईओ के पद पर कर दिया गया। विवाद बढ़ा तो सोमवार को संशोधित आदेश जारी किया गया और तबादला सूची से नाम हटाया गया। पूरे खेल से लंबे समय से तैनात बीईओ का स्थानांतरण बच गया।
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11 सितंबर को संयुक्त सचिव, लखनऊ की ओर से बीईओ के स्थानांतरण की सूची जारी हुई थी। इसमें कर्ण सिंह धाकड़ का नाम शामिल था। सोशल मीडिया पर तबादला सूची वायरल हुई तो सवाल उठने लगे। बेसिक शिक्षा विभाग में भी खलबली मच गई कि जिस नाम का कोई बीईओ जिले में है ही नहीं, उसका तबादला आदेश कैसे आ गया। विवाद बढ़ने पर 14 सितंबर की शाम शिक्षा निदेशक (बेसिक), प्रयागराज की ओर से नई सूची जारी की गई। इसमें कर्ण सिंह का नाम नहीं था।
2022 से तैनात हैं दो अधिकारी
वर्ष 2022 में तबादले के बाद पांच बीईओ आगरा आए थे। तब ओमप्रकाश अकेला को जगनेर, कैलाश प्रसाद शुक्ल को अकोला, महेंद्र सिंह को एत्मादपुर, सुमित कुमार सिंह को सैंया और रंजन गुप्ता को शमसाबाद का कार्यभार दिया गया था। तीन वर्ष पूर्ण होने पर ओमप्रकाश और कैलाश का पहले ही स्थानांतरण हो गया था। 11 सितंबर 2026 को जारी तबादला सूची में रंजन गुप्ता को मेरठ भेज दिया गया। अब सिर्फ महेंद्र सिंह एत्मादपुर और सुमित कुमार नगर क्षेत्र में तैनात हैं।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री ब्रजेश दीक्षित का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारी के जुगाड़ के कारण अभिलेखों में हेराफेरी कर कर्ण सिंह धाकड़ को कागजों में बीईओ दर्शा दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया कि जब सूची संशोधित हो तो बीईओ का नाम हट जाए और वही हुआ। जिले से एक ही बीईओ का स्थानांतरण हुआ। अभी भी दो बीईओ लंबे समय से तैनात हैं।
एडी बेसिक धीरेंद्र कुमार ने बताया कि यह निदेशालय व शासन स्तर का मामला है। हम इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। बीईओ की एक जिले में तीन साल तक की तैनाती का नियम है। कागज में शिक्षक को बीईओ कैसे बना दिया गया, ये जांच का विषय है।
शिक्षक कर्ण सिंह धाकड़ ने कहा कि रिकॉर्ड में मेरा नाम कर्ण सिंह है। मेरे परिचित लोग ही कर्ण सिंह धाकड़ कहते हैं। किसी ने जानबूझ कर नगर से ही मेरा नाम बीईओ के पद पर दर्शाकर भेजा है। इसकी गहन जांच होनी चाहिए।