मथुरा में फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच में जुटी एसटीएफ अब 2008 के बाद होने वाली सभी भर्तियों का ब्योरा तलाश रही है।गिरफ्तार बाबू महेश शर्मा के सील कमरे को खुलवाकर उसमें रिकार्ड तलाशा जाएगा।
जांच में जुटी एजेंसी के हाथ में कुछ ऐसे सुराग लगें जिसके आधार पर माना जा रहा है कि मथुरा में इससे पहले भी घोटाले हुए हैं।लिहाजा 2008 के बाद होने वाली भर्तियों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है।
शिक्षक भर्ती में अभी तक जो घोटाले सामने आए हैं उसमें 2016 में मथुरा परिषदीय स्कूलों के लिए शिक्षकों की भर्ती के 216 पद थे, जिसमें 32 फर्जी शिक्षक भर्ती कर लिए गए थे।
इससे पहले 2015 में 41 शिक्षकों की भर्ती होनी थी लेकिन 108 की तैनाती कर दी गई। 2017 में 150 से ज्यादा फर्जी शिक्षक भर्ती कर लिए गए। 2011, 2012 और 2014 में शिक्षक भर्ती पर सवाल उठे थे।
जांच कराई गई तो कई शिक्षकों के दस्तावेज जाली निकले थे। 50 शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। लिहाजा माना जा रहा है कि मथुरा में फर्जी शिक्षकों की भर्ती का घोटाला करीब दस साल से चल रहा है।
इस अवधि का पूरा रिकार्ड अब चेक किया जाएगा। बीएसए आफिस पहुंचे एसटीएफ के अधिकारियों को कुछ वर्षों का रिकार्ड ही गायब मिला था।
यहां तक की नियुक्ति पत्र जारी करने का जो लेखाजोखा था वह भी नहीं मिल पा रहा है। उपस्थिति पंजिका तक गायब है
पांच हजार दो, स्कूल मत जाओ...नौकरी चलती रहेगी
फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ के सामने शिक्षा विभाग का एक नया गोलमाल सामने आया है। पूछताछ में पता चला है कि बीएसए का बाबू उन शिक्षकों से पांच हजार रुपये महीना लेता था।
जो स्कूल रोज नहीं जाना चाहते थे। यह पैसा शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों में बंटता था। कई फर्जी शिक्षक भी इसी के चलते स्कूल नहीं जा रहे थे।
फर्जी शिक्षकों की तैनाती भी मनमाफिक स्थानों पर कर दी गई थी। महानगर और शहरों के आसपास के स्कूल इन्हें दे दिए गए थे।जबकि तमाम ऐसे शिक्षक जो अपने परेशानियों के चलते शहर के पास का स्कूल मांग रहे थे उन्हें नहीं दिया गया।