ेमैनपुरी। एसआईटी की सूची में शामिल जनपद में नौकरी कर रहे चार शिक्षकों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई करीब तय हो गई है। सुनवाई के लिए इन शेष चार शिक्षकों को बृहस्पतिवार को जिला समिति के सामने उपस्थित होना होगा। यदि ये शिक्षक समिति के सामने उपस्थित होकर अपना सही ढंग से पक्ष नहीं रखपाते हैं तो उनकी बर्खास्तगी भी की जाएगी।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2004-05 में बीएड की डिग्री हासिल करने वाले जिले में कार्यरत 81 शिक्षकों को एसआईटी ने फर्जी घोषित किया था। इनमें से तीन शिक्षकों की बर्खास्तगी वर्ष 2017 में हो गई थी। जबकि शेष 78 में से 74 की बर्खास्तगी 30 नवंबर 2019 को हुई थी। चार शिक्षकों को नोटिस जारी नहीं हो सके थे। इन शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए 10 जनवरी जिला समिति ने बुलावा भेजा है। जिला समिति आज इन शिक्षकों से इनका पक्ष सुनेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इन शिक्षकों ने यदि जिला समिति के सामने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाया तो इनकी भी बर्खास्तगी की जाएगी।
विभाग कर रहा है विशेष अपील की तैयारी
पूर्व में बर्खास्त शिक्षक कोर्ट चले गए थे। बताया जा रहा है कि ये शिक्षक कोर्ट से स्टे ऑर्डर लेकर आए हैं लेकिन जिला चयन समिति इन शिक्षकों को फिलहाल राहत देती नहीं दिख रही है। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने इन शिक्षकों के विरुद्ध विशेष अपील दाखिल करने के लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद और शासन से अनुमति मांगी है।
11 दिन बाद भी विश्वविद्यालय नहीं पहुंचे शिक्षक
जिले की फर्जी शिक्षकों की सूची में शामिल एक भी शिक्षक विश्वविद्यालय में अपना पक्ष रखने के लिए नहीं पहुंचा है। विश्वविद्यालय इन सूची में शामिल शिक्षकों से अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया है लेकिन 11 दिन बाद भी जिले का एक भी शिक्षक अपना पक्ष रखने के लिए नहीं पहुंचा। विभागीय सूत्रों के अनुसार 15 जनवरी तक ये शिक्षक विश्वविद्यालय के सामने अपना पक्ष रखने नहीं पहुंचते हैं तो इनकी बीएड की डिग्री विश्वविद्यालय भी निरस्त कर देगा।
चार शिक्षकों को नोटिस की कार्रवाई पूर्ण नहीं हो सकी थी। अब अंतिम नोटिस जारी होने के बाद संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है। आज इन शिक्षकों को जिला चयन समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विजय प्रताप सिंह, बीएसए