मैनपुरी। डेढ़ माह पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की मंडलीय टीम द्वारा लिए गए कपूरी के सभी नमूने जांच में फेल हो गए। जांच में साबित हो गया कि कपूरी में तंबाकू मिलाई जा रही थी। रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। जल्द ही कपूरी के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू हो सकता है।
मैनपुरी और कपूरी का नाता करीब आठ दशक पुराना है। देशभर में मैनपुरी की कपूरी प्रसिद्ध है, लेकिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच में कपूरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 27 नवंबर (2019) को मंडलीय सहायक आयुक्त खाद्य अजय जायसवाल और मंडलीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज वर्मा के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने बजाजा बाजार स्थित मोहनलाल कपूरी फैक्टरी में छापा मारा। यहां से कुल छह नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। इसमें कपूरी के दो, सुपारी के दो, एक तंबाकू अपमित्रक और एक रंगीन सौंफ का नमूना शामिल था। रंगीन सौंफ को छोड़कर अन्य पांचों नमूने जांच में फेल हो गए। कपूरी के दोनों नमूनों में जहां तंबाकू मिलाई गई थी, वहीं सुपारी के नमूनों की पैकिंग में मिसब्रांडिंग सामने आई। रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कपूरी के नमूने हानिकारक पाए जाने पर सीजेएम कोर्ट में और सुपारी मिसब्रांड मिलने पर अपर जिलाधिकारी न्यायालय में मुकदमे दायर किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार कपूरी के खिलाफ जल्द ही खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन बड़ा अभियान चला सकता है।
सील कर दिया था माल
छापेमारी के दौरान टीम ने छह नमूने भरे थे। इसके बाद यहां मौजूद सुपारी, कपूरी व तंबाकू को सील कर दिया था। बड़ी मात्रा में उपलब्ध इस पूरे माल को अब बेचा नहीं जा सकेगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा इसे नष्ट कराया जाएगा।
ये होती है कपूरी
देशभर में मैनपुरी की कपूरी प्रसिद्ध है। कपूरी को पान मसाला की तरह एक माउथ फ्रेशनर के रूप में जाना जाता है। सुपारी को बारीक काटकर, उसमें इलायची व अन्य चीजें मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। इसमें तंबाकू का प्रयोग नहीं होता है।
ये है नियमे
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के नियमानुसार किसी भी खाद्य पदार्थ में किसी अलग तत्व की मिलावट नहीं की जा सकती है। वहीं गुटखा व पान मसाला की अगर बात करें तो इसमें तंबाकू मिलाना पूर्णतया प्रतिबंधित है। क्योंकि इसमें लोगों के साथ धोखा माना जाता है।
नवंबर में कपूरी के पांच नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में सभी नमूने फेल पाए गए हैं। मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद कागजी कार्रवाई पूर्ण की जा रही है।
रामसुंदर प्रसाद, अभिहित अधिकारी।