ड्राइवर को बैठाकर वेतन दिया जा रहा, शिक्षक स्कूल में पढ़ाने नहीं पहुंच रहा, हाजिरी भी लग रही
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एक ओर अधिकारी शिक्षकों को अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का पाठ पढ़ाते हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगा रहा रखा है। ड्राइवर होने के बाद भी बीएसए करीब साल भर से शिक्षक से ही गाड़ी चलवा रहे हैं। खास बात यह है कि शिक्षक की संबंधित स्कूल में हाजिरी भी लग रही है।
बीएसए की गाड़ी (बोलेरो) चंद्रशेखर चला रहे हैं। यह शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हुए हैं। इनकी तैनाती खेरागढ़ ब्लाक स्थित प्राथमिक विद्यालय, नरीपुरा में है लेकिन स्कूल नहीं पहुंचते। बीएसए के ड्राइवर के पद पर रनवीर सिंह की तैनाती है लेकिन उनसे गाड़ी नहीं चलवाई जा रही है। बीएसए के लिए दी गई गाड़ी (जीप) का भी इस्तेमाल नहीं हो रहा है। रनवीर को दस से पांच बजे तक बीएसए कार्यालय में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। उनके जिम्मे कोई काम नहीं है, वह बैठकर वेतन ले रहे हैं।
पूर्व बीएसए ओमकार सिंह जीप पर ही चलते थे। उनका ड्राइवर रनवीर सिंह ही था। धर्मेंद्र कुमार सक्सेना ने जीप और ड्राइवर दोनों का इस्तेमाल नहीं किया। शिक्षक को कार्यालय में संबद्ध भी नहीं किया है। स्कूल में हाजिरी लग रही है।
चंद्रशेखर पूर्व बीएसए सत्येंद्र ढाका के समय से गाड़ी चला रहे हैं। मेरे समय में यह व्यवस्था नहीं की गई है।
- धर्मेंद्र कुमार सक्सेना, बेसिक शिक्षा अधिकारी
शिक्षक संघ करेगा विरोध
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर का कहना है कि बीएसए समेत करीब आधा दर्जन बीईओ की गाड़ियां शिक्षक चलाते नजर आ रहे हैं। इनको रिलीव करने की मांग की जाएगी। स्कूल में शिक्षक न होने पर उन्हें दोषी ठहराया जाता है।