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गड़बड़झाला : वृंदावन में सिर्फ साढ़े आठ हजार मकान

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वृंदावन (मथुरा)। नगर निगम वृंदावन क्षेत्र में टैक्स का बड़ा घालमेल सामने आ रहा है। यहां बहुमंजिला भवनों की लंबी कतार होने के बावजूद टैक्स का कॉलम खाली है। सिर्फ साढ़े आठ हजार मकान ही निगम के रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जिनसे हाउस टैक्स और वाटर टैक्स की वसूली वर्षों से होती आ रही है, जो पूरी प्रक्रिया पर तमाम सवाल पैदा करती है।
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वृंदावन नगर निगम का दायरा तेजी के साथ बढ़ रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के साथ अनाधिकृत रूप से भी तेजी के साथ वृंदावन में आवासीय क्षेत्र पांव पसार रहा है। आसपास के गांव भी अब नगर निगम की सीमा का हिस्सा बन गए हैं। यमुना के खादर में भी लोग यहां बस गए हैं। यहां तक कि यमुनापार में भी नया वृंदावन स्थापित होता जा रहा है। लेकिन निर्माण की यह स्थिति नगर निगम के रिकॉर्ड में कहीं नजर नहीं आ रही है।
हाउस टैक्स और वाटर टैक्स के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो वृंदावन क्षेत्र में सिर्फ आठ हजार कमान ही हैं, जो 22 साल से टैक्स जाम करते आ रहे हैं। यही कारण है कि पिछले कई सालों से वृंदावन में हाउस टैक्स और वाटर टैक्स की वसूली बढ़ नहीं रही है।
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22 साल से नहीं हुआ है वृंदावन में टैक्स निर्धारण
वृंदावन नगर निगम क्षेत्र में टैक्स निर्धारण पिछले 22 साल से नहीं किया गया है। यहां 1998 में अंतिम बार टैक्स निर्धारण किया गया था। इसके बाद किसी भी स्तर पर इसकी कोशिश नहीं की गई। यहां तक कि निगम क्षेत्र में बन रहे नए आवास, आश्रम और व्यवसायिक भवनों में भी हाउस टैक्स और वाटर टैक्स नहीं लगाया गया। यह स्थिति तमाम सवाल खड़े कर रही है।
नगर पालिका रहते यहां 1998 के बाद टैक्स का निर्धारण नहीं किया गया था। अब नगर निगम बनने के बाद सर्वे की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सर्वे किया जा रहा है। इसमें भवनों की स्थित स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल करीब साढ़े आठ हजार मकानों से ही हाउस-वाटर टैक्स वसूला जाता है।
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सतेंद्र कुमार तिवारी, अपर नगर आयुक्त, वृंदावन
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