आगरा के बाह के जंगलों में एशियन चिड़िया रूफस ट्रीपी (डेंड्रोकिट्टा वागाबुंडा) की चहचहाहट बढ़ रही है। इसकी आवाज लोगों को बांसुरी जैसी मधुर आवाज गीत मल्हार का एहसास कराती है। रूफस ट्रीपी का स्थानीय नाम टका चोर है। यह चिड़िया सिक्के, आभूषण, चमकदार वस्तुओं को चुरा कर अपने घोंसले में रख देती है।
चूजे उड़ान भरने के लिए हुए तैयार
बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रजनन सीजन (अप्रैल-जून) में रूफस ट्रीपी ने पतली कांटेदार टहनियों से कपनुमा घोंसला बनाए थे। अंडों से निकले चूजे उड़ान भरने लायक हो गए हैं। इससे चंबल क्षेत्र में इनकी संख्या बढ़ रही है। जंगल से लेकर घर-आंगन तक ये दिखती हैं।
रूफस ट्रीपी की पहचान
लंबाई : 30 सेमी, पूंछ 15-20 सेमी।
वजन : 90-120 ग्राम होता है।
गहरे लाल रंग की होती हैं आंखे
आंख गहरे लाल रंग और पैर भूरे रंग के होते हैं। सिर और छाती काले। चेहरा और गला गहरे रंग का होता है। पूंछ का रंग नीला-भूरा और पंखों में सफेद धब्बे से होते हैं।
रूफस ट्रीपी सर्वाहारी चिड़िया है। बीज, फल, कीड़े, छिपकली, मेंढक, छोटे पक्षी इनका भोजन होते हैं। चिड़िया सफाई भी करती है, घरों के आसपास कूडे़ के ढेर पर इन्हें चोंच मारते हुए देखा जा सकता है। ये भोजन की तलाश में शाखाओं के बीच चिपक जाती हैं। बागों और अनाज की फसलों को कुछ नुकसान पहुंचाती हैं।