साल 2020 का आगाज जितना बेहतर हुआ, उतना ही बुरा बीता। पर्यटन से जुड़े 4 लाख से ज्यादा लोगों के लिए यह कभी न भूलने वाला कड़वा अनुभव रहा। ट्रेड के 3 लाख से ज्यादा लोगों को कोरोनो संक्रमण के कारण हुए लॉकडाउन में उधार पर जिंदगी काटनी पड़ी। पहली बार 188 दिनों तक ताज बंद रहा, जिस वजह से पर्यटन उद्योग को 3 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा। अभी भी नुकसान की भरपाई शुरू नहीं हो पाई। पंचतारा होटल, एंपोरियम से लेकर छोटे दुकानदार और हॉकर तक की जिंदगी अभी पटरी पर नहीं आई है।
17 मार्च को बंदी के बाद 21 सितंबर को ताज समेत स्मारक खुले भी तो केवल 5 हजार पर्यटक ही ताज में प्रवेश करने की अनुमति दी गई, जिसने उद्योग को निराश किया। बीते साल के मुकाबले 46 लाख लोगों की कमी पर्यटन उद्योग झेल रहा है। विदेशी उड़ानें शुरू न हुईं और कैपिंग न हटी तो हालात और खराब हो सकते हैं।
ताजमहल पहली बार 188 दिनों तक कोरोना संक्रमण के कारण बंद हुआ। इससे पहले 1971 के भारत पाक युद्ध में 15 दिन और 1978 की बाढ़ में 7 दिन तक ही ताज पर्यटकों के लिए बंद हुआ था। 354 साल में पहला मौका था जब शाहजहां का उर्स नहीं हुआ और पूरे 6 महीने तक ताजमहल के अंदर बनी शाही मस्जिद में न ईद की नमाज हुई और ना ही शुक्रवार की।