उत्तर प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी द्वारा जारी की गई पर्यटन प्रचार पुस्तिका में ताजमहल का जिक्र न होने के बाद विवाद बढ़ा तो प्रदेश सरकार ने सफाई दी है। इससे ताजमहल के पुस्तक में न शामिल होने की बात अफवाह साबित हो गई, फिर भी सरकार के रुख से लग रहा है कि उसे ताजमहल से मोहब्बत नहीं रही।
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प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने ताजमहल के लिए 156 करोड़ रुपये की योजनाओं का जिक्र तो किया, लेकिन यह सभी योजनाएं पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के जमाने की हैं।
योगी सरकार में ताजमहल के लिए अब तक किसी विशेष योजना शुरू नहीं की गई है। इतना ही नहीं पर्यटन पुस्तिका में ताजमहल का जिक्र भी इस प्रकार है कि उसकी पहचान करना मुश्किल है। आगरा की जगह प्रदेश सरकार का फोकस मथुरा, वृंदावन, काशी और अयोध्या के पर्यटन विकास पर है।
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ताज देश के पर्यटन का आइना
ताजमहल गेट
पर्यटन उद्यमियों का मानना है कि ताजमहल देश के पर्यटन का आइना रहा है। दुनिया भर के लोग भारत नहीं, बल्कि ताजमहल के देश के रूप में ज्यादा जानते हैं। आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फाउंडेशन अध्यक्ष संदीप अरोरा के मुताबिक सरकार काशी, मथुरा, अयोध्या तथा अन्य पर्यटन स्थलों का प्रचार करे, लेकिन ताजमहल की कीमत पर नहीं।
ताजमहल की उपेक्षा कर प्रदेश में विदेशी पर्यटक आकर्षित नहीं किए जा सकेंगे। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश चौहान का कहना है कि ताजमहल पर पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।
उनकी सुविधाओं पर सरकार को ध्यान देना चाहिए, न कि उपेक्षित किया जाना चाहिए। सैलानी केवल ताजमहल नहीं, बल्कि देशभर के पर्यटन स्थल घूमने आते हैं। ताज के साथ अन्य स्थलों का भी विकास हो, लेकिन ताजमहल और आगरा की योजनाएं न रोकी जाएं।
देखिए आंकड़े
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
65 लाख भारतीय पर्यटक आते हैं हर साल
8 लाख विदेशी पर्यटकों को रिझाता है ताज
105 करोड़ रुपये की आय टिकट बिक्री से
2500 करोड़ रुपये का पर्यटन कारोबार
475 से ज्यादा बजट, सितारा होटल आगरा में
10 पंच सितारा होटल ताजनगरी में मौजूद
बंद हो गई ताज ओरिएंटेशन की योजना
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व की सपा सरकार ने ताजमहल के आसपास 197 करोड़ रुपये के ताजगंज प्रोजेक्ट के जरिये ताजगंज की तस्वीर बदली तो वहीं शिल्पग्राम को तोड़कर 239 करोड़ रुपये की लागत से ताज ओरिएंटेशन सेंटर प्रस्तावित किया, लेकिन कैबिनेट से शिल्पग्राम को तोड़ने की मंजूरी से पहले ही सपा सरकार का कार्यकाल पूरा हो गया।
चुनाव के बाद योगी सरकार ने ताज ओरिएंटेशन की योजना में केवल मल्टीलेवल पार्किंग को ही मंजूरी दी। योजना के अन्य हिस्सों को समाप्त कर दिया गया। आठ मई 2017 को दिल्ली में हुई बैठक में प्रदेश की पर्यटन मंत्री ने ताज ओरिएंटेशन सेंटर की योजना को संशोधित कर दिया। इसमें भी अब तक मल्टीलेवल पार्किंग का काम पर्यावरण मंजूरी न लेने के कारण रुका हुआ है। पेड़ काटने की मंजूरी के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायकर की गई है।
अखिलेश सरकार में ताजमहल के पास पर्यटन विकास की 650 करोड़ रुपये की योजनाएं चलाई गई थी, जिसमें से केवल 197 करोड़ रुपये का ताजगंज प्रोजेक्ट ही पूरा हो पाया। पार्किंग के सामने विद्युत विभाग की जमीन पर मुगल संग्रहालय का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है।
प्री-कास्टिंग तकनीक के बावजूद संग्रहालय का काम रुका हुआ है। प्रदेश सरकार में मुगल संग्रहालय नाम बदलने को लेकर भी चिंतन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक मुगल संग्रहालय का नाम जल्द ही बदला जा सकता है।