महात्मा गांधी के विचारों की विरासत के लिए पूरे देश में होड़ मची है। उनकी जयंती पर पदयात्रा निकली जा रही, गांधीजी के नाम पर स्वच्छता की बड़ी मुहिम छेड़ी जा रही है। सत्ताधारी दल भी बड़ी-बड़ी दलीलें दे रहे हैं लेकिन गांधी के इस देश में उनकी जयंती पर बापू की निशानियों का किसी को ख्याल नहीं है।
दो अक्टूबर को मथुरा में गांधी जयंती के जोरदार आयोजन होते रहे लेकिन राजकीय संग्रहालय में रखे महात्मा गांधी के अस्थि कलश पर दो फूल चढ़ाने कोई नहीं आया। जबकि इसके लिए विशेष तौर पर छुट्टी वाले दिन संग्रहालय खोला गया था।
राजकीय संग्रहालय मथुरा के उपनिदेशक डा. एसपी सिंह ने बताया कि गांधी जयंती पर हमने उनके अस्थि कलश को प्रदर्शन के लिए बाहर निकलवाया था। छुट्टी के दिन पूरे स्टाफ को बुलवाया। उपस्थिति रजिस्टर में सोमवार को आने वाले विजिटरों की संख्या शून्य रही।
नियमित संग्रहालय आने वाले साहित्यकार डा. अशोक बंसल ने कहा जिस गांधी दर्शन से देश को आजादी मिली। उन्हीं के अस्थि कलश के प्रति गांधीवादियों और नई पीढ़ी की बेरुखी चिंता की बात है।