ताजगंज प्रोजेक्ट का डिजायन और मैटेरियल अब फिर बदलेगा। एएसआई की आपत्तियों के बाद आखिर प्रदेश सरकार ने प्रोजेक्ट पर अपनी जिद छोड़ दी और एएसआई के सुझावों के मुताबिक ही काम करने पर सहमति जताई। दिल्ली में शुक्रवार को एएसआई के जनपथ स्थित मुख्यालय पर महानिदेशक स्तर की वार्ता के बाद तय हुआ कि रेड सैंड स्टोन ही लगाया जाएगा और प्रोजेक्ट में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
शुक्रवार दोपहर को जनपथ मुख्यालय में एएसआई के महानिदेशक राकेश तिवारी और प्रदेश के पर्यटन महानिदेशक नवनीत सहगल की ताजगंज प्रोजेक्ट को लेकर वार्ता हुई। बैठक के बाद सचिव पर्यटन नवनीत सहगल ने अमर उजाला को बताया कि एएसआई ने डिजाइन के संबंध में कुछ सुझाव दिए थे। राज्य सरकार उस सुझाव पर सहमत है। ताजमहल की 500 मीटर परिधि में बनाई जा रही सड़क पर पत्थरों पर एएसआई के सुझाव माने गए हैं।
बता दें कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में ताजगंज प्रोजेक्ट को लेकर सुनवाई होनी है। उससे पहले एएसआई अपनी रिपोर्ट नेशनल मॉन्यूमेंट अथारिटी को सौंपेगी और यही रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में भी पेश की जाएगी। यूपी टूरिज्म ने ग्रेनाइट की जगह पहले ही रेड सैंड स्टोन को लगाने पर सहमति पत्र एएसआई को दे दिया था।
ताज में पानी न भरने की हिदायत
ताजमहल के तीनों प्रवेश द्वारों के सड़क से नीचे होने पर पानी ताज के अंदर भरता है। एएसआई की इस आपत्ति पर भी यूपी टूरिज्म के सचिव पर्यटन नवनीत सहगल से एएसआई महानिदेशक ने चर्चा की। उन्होंने कहा कि ताज में पानी न भरे, इसका इंतजाम किया जाए। यूपी टूरिज्म और राजकीय निर्माण निगम ने ड्राइंग के साथ एएसआई अधिकारियों को पूरे प्लान की जानकारी दी।