कॉमेडी नाइट भी हुई और रोमांस के गीत भी गाए गए। अब महोत्सव पिट जाने पर आयोजन समिति दर्शकों की कम संख्या के पीछे बोर्ड परीक्षाओं के पहले ही शुरू हो जाने और झूलों के बाहर लगने को जिम्मेदार मान रही है।
शुरुआत के चार दिन तक तो शिल्पग्राम में आगे की दो पंक्तियों में भी दर्शक नहीं थे। पूरा पंडाल खाली पड़ा रहा। यही हाल रविवार छोड़ बाकी दिन बना रहा। महोत्सव समिति ने देशभक्ति के किसी कार्यक्रम का आयोजन दस दिनों में नहीं किया।
हालांकि कुछ और भी कारण माने जा रहे हैं। महंगा टिकट, झूलों यानी फन जोन के बाहर होने के असर ताज महोत्सव पर पड़ा है। इस साल महोत्सव में प्रवेश टिकट दर 50 रुपये थी। फिर भी महज 26 लाख रुपये के टिकट ही बिके।
10 दिनों में केवल रविवार को ही 14,800 तक टिकट बिके। बाकी सभी दिन इनकी संख्या 3-4 हजार के बीच रही। हैरतअंगेज पहलू ये है कि बड़े और नामी कलाकारों के दिन टिकट संख्या 5-6 हजार तक सीमित रही, जबकि शनिवार-रविवार को कोई बड़ा कलाकार न होने के बाद भी सबसे ज्यादा दर्शक आए।
दिन टिकट बिके
18 फरवरी 300
19 फरवरी 4000
20 फरवरी 2480
21 फरवरी 3340
22 फरवरी 4400
23 फरवरी 8820
24 फरवरी 14,800
25 फरवरी 6840
26 फरवरी 6020
27 फरवरी 5016
शिल्प मेले में 2500 लोग पहुंचे
बुधवार को ताज महोत्सव का औपचारिक समापन हो गया, लेकिन शिल्प मेला तीन दिन के लिए बढ़ा दिया गया था। गुरुवार को शिल्प मेले में खरीददारी करने के लिए 2500 लोग पहुंचे। इनके लिए प्रवेश टिकट दर भी 50 रुपये से घटाकर 20 रुपये कर दिया गया है।
चटख धूप खिले होने के कारण महिलाओं की संख्या काफी रही। शिल्प मेले से ज्यादातर शिल्पी भी गुरुवार को जाना शुरू हो गए। दरअसल, उनका रिजर्वेशन और ट्रक की बुकिंग होने के कारण वह गेट पास लेकर चले गए।